गोहाना । पराली जलाने पर उपमंडल के दो किसानों पर कृषि विभाग के 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाने के विरोध में मंगलवार को किसानों ने लघु सचिवालय में एसडीएम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों पर लगाए गए जुर्माने के प्रावधान को वापस लिया जाए और जिन किसानों पर जुर्माना किया है उनको उनकी राशि वापस करे।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान अशोक लठवाल ने कहा कि सरकार पराली का खुद प्रबंध करने की बजाय किसानों पर जुर्माना लगाकर उनके साथ अन्याय कर रही है। सरकार किसानों पर कार्रवाई न करें और खुद पराली का प्रबंधन करे। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम आशीष वशिष्ठ को ज्ञापन सौंपा। साथ ही किसानों ने चेतावनी दी कि यदि पराली जलाने पर उन पर जुर्माना किया गया तो दूसरा रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पराली जलाने वाले किसानों की सरकारी सहायता बंद करने का दिया प्रस्ताव
सोनीपत। पर्यावरण संरक्षण व लोगों के स्वास्थ्य के दृष्टिगत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक ने उपायुक्त से सिफारिश की है कि पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता न दी जाए। यदि कोई किसान ऐसा करता है तो उसको दी जा रही सहायता तुरंत बंद कर दी जाए।
उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में फसल का अवशेष न जलाएं। पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है, इससे स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। पराली न जलाने वाले किसानों को सरकार ने कई प्रकार की सुविधाएं दी हैं। किसानों को विशेष रूप से प्रोत्साहन दिया गया है। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डाॅ. पवन शर्मा ने बताया कि उन्होंने उपायुक्त को प्रस्ताव दिया है कि पराली जलाने वाले किसानों को कृषि योजनाओं के तहत दी जा रही सरकारी सहायता को तुरंत रोक लगाएं। साथ ही अन्य प्रकार की कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ऐसे किसानों की भूमि अटैच करने पर भी विचार कर रहा है। इस प्रकार के कड़े कदम उठाने आवश्यक हैं, ताकि कोई भी किसान पराली न जलाए।
पराली जलाने वालों पर जुर्माना लगाकर करें मुकदमा : एसडीएम
गन्नौर। एसडीएम डॉ. निर्मल नागर ने पराली न जलाने के लिए लघु सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो किसान पराली जलाते मिले उस पर जुर्माना लगाकर मुकदमा दर्ज किया जाए। उनको कहा कि फसलों के अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण और भूमि की उपजाऊ शक्ति भी नष्ट होती है। फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह से पाबंदी है। अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करें।
एसडीएम ने कहा कि खेतों में आग लगाने वाले लोग नासमझी करते हैं, जिससे मिट्टी की मृदा शक्ति नष्ट होने के साथ पर्यावरण को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फसलों के अवशेष जलाता पाया जाता है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों व एसडीएम कार्यालय में दें। एसडीएम ने किसानों से आह्वान किया कि वे पराली न जलाएं। ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह रेड जोन वाले गांवों का नियमित रूप से निरीक्षण करें। एसडीएम ने बताया कि गन्नौर खंड में अभी तक 7 किसानों पर जुर्माना लगाया गया है और एक किसान पर 188 के तहत मुकदमा भी दर्ज किया गया है। इस दौरान तहसीलदार मनोज कुमार, खंड कृषि अधिकारी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
चंडीगढ़ की बैठक में 9 को आंदोलन का निर्णय लेंगे किसान
खरखौदा। भारतीय किसान नौजवान यूनियन की खंडस्तरीय बैठक पिपली स्थित केएमपी के टोल प्लाजा पर हुई।
जिला को-ऑर्डिनेटर इंदरजीत सिंह राणा ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीति के चलते आंदोलन तेज और व्यापक करने की जरूरत है। ऐसे में 9 अक्तूबर को चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की हरियाणा, पंजाब व राजस्थान की बैठक बुलाई है, जिसमें जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। बैठक में एमएसपी गारंटी कानून, भूमि अधिग्रहण कानून, खराब फसलों के मुआवजे जैसे मुद्दों पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक से पहले 2 वर्ष पहले लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी गई।
ब्लाॅक प्रधान बेदी दहिया ने कहा कि वह गांवों में जाकर किसानों को लामबंद कर रहे हैं। जिससे आगामी चुनावों में भाजपा पर वोट की चोट की जा सके। उन्होंने कहा कि रबी की फसलों की बुआई का समय नजदीक आ गया है और किसानों को डीएपी-यूरिया मिलने में समस्या हो रही है। कुछ दुकानदारों की ओर से डीएपी-यूरिया खाद के साथ किसानों को जबरदस्ती अन्य कीटनाशक दिया जा रहा है। ऐसे दुकानदारों की दुकानों के बाहर किसानों द्वारा धरना लगाया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सतबीर दहिया ने की व मंच संचालन विकास राणा ने किया। इस दौरान कैप्टन बिजेंद्र दहिया, इंदरजीत सिंह राणा, विकास राणा, कर्मबीर दहिया, रोहताश दहिया, राजू दहिया, आजाद कोहाड़ व बलराज मंडोरी मौजूद रहे।