सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 पर मुरथल के ढाबों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी को लेकर ढाबा मालिकों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। नगर निगम ने मई में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चालू करने की तैयारी थी, लेकिन एजेंसी मशीनरी इंस्टॉल करने का काम भी पूरा नहीं कर पाई है। निगम अधिकारियों ने एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए मुरथल थाना पुलिस को शिकायत दी है। 7.5 करोड़ रुपये खर्च कर दो साल में सीवर लाइन बिछाने व एसटीपी चालू करने का काम किया जाना था, लेकिन निर्माण में देरी होने के कारण लागत बढ़कर अब 9.5 करोड़ रुपये हो चुकी है। उसके बाद भी काम गति नहीं पकड़ पा रहा है।
सीवर लाइन व एसटीपी के निर्माण के लिए मुरथल ढाबा एसोसिएशन के सदस्य डेढ़ दशक से मांग कर रहे हैं। नगर निगम ने वर्ष 2017 में मुरथल के ढाबों के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (जीटी राेड) के साथ 1008 मीटर सीवर लाइन डाली थी। इस सीवर लाइन को 9.5 करोड़ रुपये की लागत से मुरथल विश्वविद्यालय के पीछे निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डाला गया है। इस प्लांट की क्षमता तीन न्यूनतम तरल निर्वहन (एमएलडी) है। नगर निगम ने इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य 30 अप्रैल निर्धारित किया था, लेकिन मशीन इंस्टाल करने में देरी होने के कारण काम अधर में लटका हुआ है। निगम अधिकारियों की तरफ से एजेंसी को कई बाद नोटिस दिए गए, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में निगम की ओर से मुरथल थाने में एजेंसी के खिलाफ शिकायत दी है।
ट्रैफिक पार्क के लिए जमीन जाने के बाद बढ़ाई गई थी सीवर लाइन की लंबाई
मुरथल विश्वविद्यालय के पीछे बनने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च (ट्रैफिक पार्क) के लिए परिवहन विभाग को साढ़े 16 एकड़ जमीन दे रखी है। इसके चलते सीवर लाइन की लंबाई करीब 300 मीटर और बढ़ानी पड़ी थी। अब यह 1308 मीटर में बिछाई जा रही है। इसके चलते सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करने में देरी हुई। एसटीपी चालू होने के बाद मुरथल के ढाबों से निकलने वाले पानी का शोधन कर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में प्रयोग में लाया जाएगा। ढाबों का शोधित पानी प्लांट में कूड़े को गलाने में प्रयोग किया जाएगा। साथ ही मुरथल विश्वविद्यालय में सिंचाई में पानी का प्रयोग हो सकेगा।
मुरथल विश्वविद्यालय में मशीन इंस्टाल करने का काम धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए मुरथल थाने में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही एजेंसी को दो माह में काम पूरा करने की चेतावनी दी गई है।
- विशाल गर्ग, अधीक्षण अभियंता नगर निगम