पांच जून से शुरू होने वाले जाट आरक्षण आंदोलन से निपटने के लिए जिला प्रशासन फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रहा है। प्रशासन ने न केवल मुनक नहर पर दिनरात ड्रोन से नजर रखने का निर्णय लिया है बल्कि उसे समय पर सूचना मिल सके, इसके लिए सीआईडी के साथ-साथ नंबरदार, ग्राम सचिव और पटवारियों की भी ड्यूटी लगाई हैं।
दरअसल, प्रकाश आयोग की सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में गुप्तचर विभाग की भूमिका पर भी टिप्पणी की गई है। सवाल उठ रहे हैं कि समय पर सड़क जाम या दंगों की संबंधित अधिकारियों को सूचना नहीं मिल सकी। ऐसे में समय रहते कदम नहीं उठाए जा सके। इस बार जिला प्रशासन ने फैसला किया है कि समय पर सूचनाओं के लिए सीआईडी के भरोसे नहीं रहा जाए। यही वजह है कि डीसी, डीआईजी और एसडीएम की आपात मीटिंग में तय किया गया है कि गांवों में नंबरदार, पटवारी व ग्राम सचिव की भी इनफार्मर के तौर पर ड्यूटी लगाई जाए। क्योंकि इससे न केवल सीआईडी पर दबाव रहेगा, बल्कि सूचनाओं को क्रास भी किया जा सकेगा। साथ ही उन लोगों पर भी दबाव बढ़ेगा, जो आंदोलन की आड़ में उपद्रव कर सकते हैं।
हर पहलू पर गंभीरता से कर रहे काम
एक आला अधिकारी ने बताया कि इस बार जिला प्रशासन आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता। न केवल फोर्स को सही ढंग से सही जगह तैनात किया जा रहा है, बल्कि खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए गुप्तचर शाखा को भी कड़ी हिदायत है। साथ में दूसरे माध्यमों से भी समय पर सूचनाएं मिलने की व्यवस्था की जा रही है।
मुनक नहर, जीटी रोड, रेलवे ट्रैक व गोहाना पर विशेष निगाह
दंगों के दौरान मुनक नहर को काटने से दिल्ली पानी की सप्लाई बंद हो गई। साथ में जीटी रोड और दिल्ली-अंबाला रेलवे ट्रैक पर कई दिन बंद रहा। गोहाना भी लगातार हिंसा की आग में जलता रहा। क्योंकि चारों जगह किसी भी गतिविधि से सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ता है। यहीं कारण है कि चारों तरह सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
मुनक नहर की सुरक्षा के लिए उच्च क्वालिटी का दिल्ली से ड्रोन मंगवाया गया है, जो कल तक आ जाएगा। यह ड्रोन रात को भी नहर पर नजर रख सकेगा। वहीं अबकी सीआईडी के साथ-साथ ग्राम सचिव, पटवारी और नंबरदार को भी सूचनाएं देने के लिए कहा गया है। तीनों अपने एरिया के एसडीएम को रिपोर्ट करेंगे।
-केएम पांडुरंग, जिला उपायुक्त