हरियाणा के सोनीपत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. संजीव आर्य की अदालत ने अवैध शराब बेचने से रोकने पर बुजुर्ग की हत्या करने के मामले में सुनवाई करते हुए एक आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 15 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न देने पर तीन माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।
सिक्का कॉलोनी गंदा नाला के पास रहने वाले जॉनी ने 10 सितंबर, 2017 को सिविल लाइन थाना पुलिस को बताया था कि उनके पिता कन्हैया लाल (65) सेक्टर-15 पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ई-रिक्शा का काम करते थे। उनकी दुकान के पास ही सेक्टर-15 निवासी सोनू उर्फ सिया अवैध शराब का धंधा करता था।
अवैध रूप से शराब बेचने को लेकर उनके पिता की आरोपी के साथ कहासुनी हुई थी। कुछ दिन पहले आरोपी सिया उनके पिता के पास आया था और उनके पिता को धमकी दी थी कि उसकी शिकायत पुलिस को देने के चलते वह उसे जान से मार देगा। जिसके बाद आरोपी चला गया था।
जॉनी ने पुलिस को बताया था कि 9 सितंबर, 2017 को देर रात उनके पिता अपनी दुकान से साइकिल पर घर की तरफ जा रहे थे। वह भी अपने पिता के पीछे चल रहा था। जब उनके पिता सेक्टर-14 में ईजी-डे के पास पहुंचे थे तो इसी दौरान सोनू उर्फ सिया कार में सवार होकर आया था उनके पिता को गोली मार दी थी। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
मामले में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सिविल लाइन थाना प्रभारी अनिरुद्ध की टीम ने आरोपी सिया व दो अन्य को गिरफ्तार किया था। पुलिस उनसे हत्या में प्रयुक्त हथियार व कार बरामद की थी। पुलिस पूछताछ में पता लगा था कि सिया उर्फ सोनू ने कन्हैया के पास कार रुकवाकर नीचे उतर उन्हें गोली मार दी थी। बाद में साथी संग भाग गया था।
मामले में सुनवाई के बाद एएसजे डॉ. संजीव आर्य की अदालत ने सिया उर्फ सोनू को दोषी करार दिया। अन्य दो आरोपियों को बरी कर दिया गया था। मामले में सोमवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने दोषी सिया को हत्या के मामले में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा अवैध शस्त्र अधिनियम में तीन साल कैद व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजा एक साथ चलेंगी।
पांच साल बाद मिल गया न्याय
बुजुर्ग की हत्या के मामले में गवाह योगी कर्ण नाथ उर्फ राम ने कहा कि पांच साल में उन्हें न्याय मिल गया है। उनका कहना है कि मामले में उन्होंने सत्य का साथ देते हुए गवाही दी थी। जिस पर न्यायपालिका ने दोषी को सजा दी है।