एक सप्ताह पहले मेरठ में छापा मारकर लिंग जांच का भांडा फोड़ करने वाली जींद हेल्थ टीम ने बुधवार को सोनीपत में एक निजी नर्सिंग होम में छापा मारा।
इस दौरान टीम ने लिंग जांच व गर्भपात करने के मामले का पर्दाफाश किया है। सोनीपत हेल्थ विभाग की टीम के साथ कार्रवाई करते हुए टीम ने अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी और 10 हजार रुपये भी बरामद किए हैं। आरोप है कि ये पैसे गर्भपात के लिए दिए गए थे।
फिलहाल डाक्टर आदर्श शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने नर्सिंग होम की संचालिका एमबीबीएस डाक्टर आशा अरोड़ा व पूर्व हेल्थ वर्कर ऊषा के खिलाफ पीएनडीटी व एमटीपी के तहत केस दर्ज किया है। देर रात तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
डीसी राजीव रत्न ने बताया कि उनके पास डीसी जींद विनय सिंह का फोन आया था कि जींद हेल्थ टीम को सूचना मिली है कि सोनीपत में लिंग जांच का काम किया जा रहा है।
इसके बाद मंगलवार शाम को ही जींद की हेल्थ टीम डाक्टर सतीश सुलेख के नेतृत्व में सोनीपत पहुंच गई। साथ में जींद पुलिस की महिला इंस्पेक्टर व एक सिपाही भी थी। योजना के तहत एक महिला को फर्जी ग्राहक के तौर पर तैयार किया गया।
ग्राहक ने पूर्व हेल्थ कर्मी ऊषा से फोन पर बात की। ऊषा ने सुबह लिंग जांच करने वाले क्लीनिक का नाम बताने की बात कही। सुबह करीब आठ बजे संपर्क किया तो अरोड़ा नर्सिंग होम पर आने को कहा। इस दौरान स्वास्थ्य की टीम वहां पहुंच गई।
साढ़े 12 हजार में हुआ सौदा, 10 हजार बरामद
हेल्थ विभाग के मुताबिक अल्ट्रासाउंड कराने वाली एक महिला को पहले ही एक-एक हजार रुपये के 10 नोट दिए गए थे। महिला ने नर्सिंग होम में जाकर गर्भपात कराने की बात कही।
इस पर महिला को छह हजार रुपये का खर्च बताया गया और जब उसका अल्ट्रासाउंड किया गया तो बताया गया कि गर्भ में 20 सप्ताह का बच्चा है इसलिए 15 हजार रुपये का खर्च आएगा। दोनों के बीच साढ़े 12 हजार रुपये में सौदा तय हो गया।
ग्राहक महिला ने कहा कि उसके पास फिलहाल 10 हजार रुपये हैं और ढाई हजार रुपये का भुगतान बाद में कर दिया जाएगा। जैसे ही महिला ने 10 हजार रुपये दिए तो नर्सिंग होम पर विभाग की टीम ने छापा मारकर पैसे बरामद कर लिए।
नहीं भरा गया था फार्म एफ
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस दौरान जांच पड़ताल में पाया कि गर्भवती महिलाओं से अनिवार्य रूप से भरवाया जाने वाला फार्म-एफ भी नहीं भराया गया था। इस फार्म में गर्भवती महिला द्वारा यह सहमति व्यक्त की जाती है कि वह अल्ट्रासाउंड के दौरान अपने गर्भ के लिंग की जांच नहीं करवाएगी।
इसके अलावा जांच में पाया गया कि नर्सिंग होम का ओपीडी रिकार्ड भी पूरा नहीं था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर ही अल्ट्रासाउंड मशीन व नर्सिंग होम के अन्य रिकार्ड को सील कर दिया और उस पर नर्सिंग होम की संचालिका डा. आशा अरोड़ा के हस्ताक्षर भी करवाए गए।
मामला दर्ज, अभी गिरफ्तारी नहीं
ओल्ड सिटी चौकी प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि हेल्थ विभाग की शिकायत पर महिला डाक्टर आशा अरोड़ा व पूर्व हेल्थ वर्कर ऊषा के खिलाफ पीएनडीटी व एमटीपी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच पड़ताल करने के बाद गिरफ्तारी की जाएगी।
आईएमए ने जताया विरोध, डीसी से की मुलाकात
उधर, आईएमए से जुड़े एक दर्जन निजी डाक्टर जिला उपायुक्त राजीव रंजन के पास पहुंचे और कहा कि महिला डाक्टर आशा अरोड़ा को योजना के तहत फंसाया गया है।
डीसी ने आईएमए के सदस्यों को आश्वासन दिया कि एफआईआर के बाद निष्पक्ष जांच होगी। लिंग जांच के मामलों में सरकार का रवैया बेहद सख्त है।
जींद डीसी का आया था फोन
डीसी राजीव रंजन ने बताया कि जींद की हेल्थ टीम वहां के डीसी विनय सिंह से अनुमति लेकर आई थी। सिंह का फोन उनके पास आया था। छापे के बाद सोनीपत हेल्थ विभाग को सूचित किया गया। इसके बाद दोनों जिलों की टीम ने मिलकर कार्रवाई की है।