पंचायत चुनाव में वोट के लिए उम्मीदवार ‘लालपरी’ का खुलकर प्रयोग कर रहे हैं। शराब की बढ़ती डिमांड पर शराब ठेकेदार भी जमकर फायदा उठा रहे हैं। इसका खुलासा वीरवार को हुआ। थाना शहर पुलिस ने दो शराब ठेकेदारों को पकड़कर सस्ती शराब पर महंगी शराब के लेबल लगाकर बेचने के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है।
आबकारी विभाग की टीम के साथ थाना शहर पुलिस ने बुधवार देर रात और गुरुवार को ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित दो अलग-अलग गोदामों पर छापा मारकर चार हजार से अधिक शराब की पेटियां बरामद की है। खास बात यह कि सारी शराब अवैध है, इसका कोई बिल या रिकार्ड नहीं मिला है।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो यह शराब पंचायत चुनावों के चलते अलग-अलग जगहों पर सप्लाई होनी थी। बहरहाल पुलिस ने अवैध शराब और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामले दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
जितेंद्र के गोदाम से 20,700 बोतल
पुलिस प्रवक्ता जगजीत सिंह ने बताया कि सिटी एएसआई रामकुमार की टीम औद्योगिक क्षेत्र में गश्त कर रही थी। सूचना मिली कि एक शराब के गोदाम में भारी मात्रा में अवैध शराब रखी है। शराब पर सीएसडी कैंटीन के लेबल लगाए जा रहे हैं। पुलिस टीम ने आबकारी एवं कराधान विभाग की टीम के साथ मिलकर छापामारी की और गोदाम से शराब की 20 हजार 700 बोतलें बरामद की गईं। पुलिस ने मौके से सिसाना के जितेंद्र को गिरफ्तार, बरामद किए गए लेबल भी जब्त कर लिए हैं।
सुरेंद्र के गोदाम से 2300 पेटी बरामद
वीरवार दोपहर को डीएसपी राहुल देव के नेतृत्व में थाना शहर व आबकारी विभाग के एटीओ आत्माराम और निरीक्षक पवन की टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में फिर से छापामार कार्रवाई की। टीम ने औद्योगिक क्षेत्र स्थित गांव बुटाना निवासी सुरेंद्र के गोदाम से करीब 23 सौ पेटी अवैध शराब बरामद की। गिनती करने पर 27 हजार 600 शराब की बोतलें पाई गई। यहां से भी पुलिस ने कुछ ब्रांड के लेबल बरामद किए हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस शराब को चंडीगढ़ से लाकर सीएसडी कैंटीन के ब्रांड के लैबल लगाकर पंचायत चुनाव में अलग-अलग गांवों में सप्लाई करना था।
चंडीगढ़ से लाई गई थी शराब
बरामद की गई शराब की खेप 22 कैरेट की हैं। ये शराब चंडीगढ़ डिस्टलरी से लाई गई है, जहां से इसे अरुणाचल प्रदेश भेजा जाता है। उसी में से यह शराब बिना किसी बिल और रसीद के लाई गई थी। आरोपियों को शुक्रवार को रिमांड पर लेने की कोशिश की जाएगी।
100 रुपये की बोतल मार्का बनते ही बन जाती है 250 की
जानकारों की मानें तो 22 कैरेट शराब की एक बोतल बाजार में 100 रुपये में आती है। जो लेबल इन पर लगाए जा रहे थे, उनकी बोतल बाजार में 250 रुपये में आती है। दोनों गोदामों पर 48 हजार 300 शराब की बोतलें थी। अगर 100 रुपये के हिसाब से मार्केट में बेची जाए तो इसकी कीमत 48 लाख 30 हजार रुपये बनती है। जबकि लेबल बदल कर इनकी कीमत 250 रुपये प्रति बोतल के हिसाब से 1 करोड़ 20 लाख रुपये बनती है। यानी इन पेटियों पर कुल 72 लाख 45 हजार रुपये का मुनाफा था।
गिरफ्तार आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। इस मामले से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। लेबल बनाने वाले से लेकर शराब देने वाले तक सभी को काबू कर लिया जाएगा।
राहुल देव, डीएसपी।