जिले में डेंगू की चपेट में आने से एक वृद्ध की बुधवार को मौत हो गई। इस मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग के सभी दावों की पोल खुल गई है। वहीं गांव उल्देपुर में एक और पॉजिटिव केस सामने आने से जिले में अब तक डेंगू के 11 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जबकि 50 से ऊपर संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं।
इधर, डेंगू की रोकथाम के लिए खुद सिविल सर्जन और जिला मलेरिया अधिकारी को दौड़ लगानी पड़ रही है, बावजूद कुछ न कुछ खामियां उजागर हो रही हैं। वहीं पिछले एक सप्ताह से डेंगू के केसों की संख्या बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ी हुई है।
जिस उल्देपुर निवासी सुरेश कुमार (51) की डेंगू की चपेट में आने से मौत हुई है, उसे पिछले कई दिनों से तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत थी। शुरुआत में परिजनों ने सामान्य बुखार समझकर उसका इलाज किया, लेकिन इस बीच उसकी हालत बिगड़ गई।
बाद में उसे नजदीकी अस्पताल में भी भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत में कोई सुधार नहीं दिखा। सुरेश की प्लेटलेट्स लगातार कम हो रही थी, जिससे उसकी हालत पूरी तरह बिगड़ गई। अंतत: मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया।
दिल्ली बार्डर के आसपास सबसे अधिक संदिग्ध केस
दिल्ली बॉर्डर के आसपास डेंगू के संदिग्ध मरीजों की सबसे अधिक संख्या सामने आ रही है। दिल्ली बॉर्डर के आसपास गांव से दर्जनों संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं जिनमें कुछ केसों के पॉजिटिव रिपोर्ट भी सामने आई है।
सीएमओ ने किया प्रभावित गांवों का दौरा
जिले में डेंगू की रोकथाम के लिए हालांकि स्वास्थ्य विभाग नित नई-नई योजनाएं बनाकर काम कर रही है, बावजूद डेंगू के संदिग्ध केस सामने आ रहे हैं। निजी अस्पतालों से लेकर आयुर्वेद डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य विभाग बैठक आयोजित कर डेंगू की रोकथाम के लिए आदेश जारी किया है। इस दौरान खुद सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया उन गांवों का दौरा किया है जहां डेंगू की पुष्टि हुई है।
गांव बेगा में बढ़ रहे डेंगू के संदिग्ध मरीज
गांव बेगा में अब तक 5 पांच केसों की पुष्टि की जा चुकी है जबकि कई संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग इस गांव पर विशेष नजर बनाकर अभियान चला रहा है।
बृहस्पतिवार को भी मलेरिया विभाग की पूरी टीम ने गांव जाकर 722 घरों की जांच की। जहां विभागीय टीम ने 125 कूलर, 227 टंकियां, 260 मटके व कंटेनर की जांच की। साथ ही पूरे गांव में फॉगिंग कराई गई है। साथ ही डेंगू की रोकथाम के लिए ग्रामीणों को जागरूक भी किया गया।
डेंगू की रोकथाम के लिए पूरा मलेरिया विभाग सक्रिय है। दिनरात सभी कर्मचारी कूलरों से लेकर टंकियों की सफाई के काम में जुटे हैं। फिलहाल डेंगू से पीड़ित मरीज की जानकारी उनके संज्ञान में भी नहीं है।
-बलबीर सिंह, जिला स्वास्थ्य निरीक्षक, मलेरिया विभाग
डेंगू पॉजिटिव लिखने पर सिविल सर्जन ने उठाए सवाल
सुरेश नामक व्यक्ति की डेंगू से हुई मौत को सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने सिरे से खारिज कर दिया है। डॉ. पूनिया का कहना है कि जब तक किसी सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान डेंगू की पुष्टि नहीं होती तब तक किसी भी मरीज को डेंगू पॉजीटिव कैसे कहा जा सकता है।
वहीं डॉ. पूनिया ने डेड बॉडी रजिस्टर में दर्ज डेंगू की पॉजिटिव रिपोर्ट लिखे जाने पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की पुष्टि ही नहीं की तो उसे रजिस्टर में पॉजिटिव लिखने का सवाल ही नहीं उठता। वह इस पूरे विषय की जांच करेंगे कि किसके आदेश पर रजिस्टर में डेंगू पॉजिटिव दर्ज किया गया।