बरोदा रोड स्थित देवी नगर में संदिग्ध हालात में हुई दलित किशोर गोविंदा की मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल उठे हैं।
गोविंदा की तेरहवीं हुए भी एक सप्ताह हो गया है, लेकिन अब तक न तो पुलिस और न ही गठित एसआईटी का कोई अफसर मृतक के घर पहुंचा है। बेटे के सदमे से उसकी मां संजीत बीमार हो गई है। गोविंदा के भाई गौतम ने शनिवार को फिर दोहराया कि परिवार को सीबीआई जांच ही चाहिए।
बता दें कि गोविंदा की मौत हुए 17 दिन हो गए हैं। उसकी तेरहवीं तक उसके घर नेताओं का तांता लगा रहा। प्रशासन ने भी अंतरिम राहत के रूप में 2.81 लाख का मुआवजा देने में देर नहीं की। एक नवंबर को तेरहवीं होने के बाद से मृतक गोविंदा के घर में सन्नाटा पसरा हुआ है।
उसकी मां संजीत चारपाई पर पड़ी हुई है। वह जवान बेटे को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रही है। 14 साल के दलित गोविंदा की मौत पर एससीएसटी एक्ट और हत्या का केस सिटी थाने के दो पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज है, उसमें एक नाम का कर्मचारी थाने में है ही नहीं। एसआईटी ने कहा था कि वह सिटी थाने में तैनात तमाम पुलिस वालों की शिनाख्त गोविंदा के परिवार से करवाएगी ताकि असली गुनहगार की गर्दन नापी जा सके।
गोविंदा के भाई गौतम ने सवाल उठाया कि आज तक शिनाख्त के लिए कहना दूर, पुलिस या एसआईटी का कोई अधिकारी या कर्मचारी जांच के लिए उनके दरवाजे पर नहीं आया है। गौतम के अनुसार, आरोपी पुलिस वाले और जांचकर्ता भी पुलिस वाले हैं। परिवार को नहीं लगता कि पुलिस, पुलिस को बचाने की कोशिश नहीं करेगी। ऐसे में इंसाफ की उम्मीद कम ही है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहती है, सुनपेड़ कांड की तरह से इस प्रकरण की भी सीबीआई से ही जांच करवानी चाहिए।
वहीं, इस मामले में पुलिस का कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं है कि जांच कहां तक पहुंची और कार्रवाई में क्या सामने आया है। सभी अधिकारी केवल जांच पर अड़े हुए हैं।