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16 नवंबर को न्याय नहीं मिला तो दिल्ली से शुरू होगा आंदोलन

Mon, 02 Nov 2015 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला गोहाना
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दलित किशोर गोविंदा की मौत के मामले में न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार और समाज के लोगों में रोष है। रविवार को यहां के देवीनगर में गोविंदा की तेरहवीं की गई, जिसमें सभी समाज के पदाधिकारी और अन्य लोग शामिल हुए। इस दौरान दलित व पिछड़ा वर्ग के पदाधिकारियों ने फैसला लिया कि अगर 16 नवंबर को परिवार को न्याय नहीं मिला तो वे दिल्ली से आंदोलन शुरू करेंगे।
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गोविंदा की तेरहवीं कार्यक्रम में पहुंचे अखिल भारतीय दलित महापंचायत प्रदेश अध्यक्ष दीपक दैत्य, आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के संरक्षक आजाद दांगी, हरियाणा प्रदेश चमार महासभा के उपाध्यक्ष जगशेर व धानक महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष राकेश बागड़ी, प्रदेश महासचिव रवि इंदौरा के अलावा गोविंदा के भाई गौतम, मां संजीत, फूफा रामनिवास आदि का कहना है कि गोविंदा की मौत हुए 11 दिन हो गए, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई हैं। गोविंदा के हत्यारे नौकरी पर तैनात हैं और खुलेआम घूम रहे हैं।

गोविंदा की मौत के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता यहां पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि ये नेता सांत्वना देने नहीं, बल्कि अपना राजनैतिक मतलब निकालने के लिए आए थे। कांग्रेस सरकार में दलितों के साथ कई घटनाएं घटीं और अब बीजेपी सरकार में यही हालात शुरू हो गए। 11 दिन बार भी भाजपा का कोई मंत्री परिजनों को ढांढस बंधाने नहीं पहुंचा है। यहां तक कि गोविंदा की तेरहवीं में भी कोई  प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।
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उन्होंने बताया कि इस मामले में एससी/एसटी आयोग ने 16 नवंबर को आईजी, डीसी व एसपी को तलब किया है। अगर 16 नवंबर को परिजनों को न्याय नहीं मिला तो दिल्ली से जोरदार आंदोलन शुरू किया जाएगा। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस संबंध में समय भी लिया जाएगा।

यह है मामला
22 अक्टूबर की सुबह देवीनगर के एक मकान में दलित किशोर गोविंदा का शव मिला था। इससे परिजनों ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक गोहाना-जुलाना मार्ग व रोहतक-पानीपत रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था। आरोप था कि पुलिस ने गोविंदा पर कबूतर चोरी के झूठे केस में फंसाया और बाद में थाने में बुलाकर उसकी हत्या कर शव को उसी के ताऊ के घर में डालकर फरार हो गए थे।

एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचकर उनकी मांगों को मानने का आश्वासन दिया था। पुलिस ने एएसआई सुभाष व एएसआई अशोक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन परिजनों ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रर्वाई की मांग को लेकर शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया था। घटना के एक दिन बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह परिजनों से मिलने पहुंचे थे। इसके बाद प्रशासन ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एटरो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

वहीं, परिजनों ने गोविंदा का दाह संस्कार किया था। सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए एसआईटी तथा स्पेशल एफएसएल टीम गठित की गईं। 26 अक्टूबर को एससीएसटी आयोग द्वारा तलब किए गए गोहाना एसडीएम व डीएसपी से दलीलें सुनने के बाद आयोग ने एसआईटी को रिजेक्ट कर दिया था और 16 नवंबर को डीसी व एसपी समेत आईजी को आयोग ने तलब किया था।
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