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सुरक्षित नहीं सोनीपत जेल की सलाखें

Fri, 27 Nov 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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आपने कई पुरानी फिल्मों में देखा होगा कि हीरो से बचने के लिए विलेन खुद को कानून के हवाले कर देता है और जेल में पहुंच जाता है। कई फिल्मों में डायलॉग भी है कि जेल की सलाखों के पीछे मैं सुरक्षित भी रहूंगा। लेकिन सोनीपत की बात करें तो इस तरह के डायलॉग का मतलब ही खत्म हो जाता है। वैसे भी जिले में क्राइम का ग्राफ बहुत ऊंचा है। पड़ोसी जिलों के मुकाबले में हर माह लगभग 10 हत्याएं ज्यादा होती हैं। लेकिन जिला कारागार में भी कैदियों की सुरक्षा का कोई खास बंदोबस्त नहीं है। कई बार विवादों के साए में रही जिला जेल अब एक बार फिर दो बंदियों के बीच झगड़े की घटना के बाद से विवादों में हैं।
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विवाद इसलिए कि एक बंदी ने दूसरे बंदी पर प्लेट को हथियार बनाकर हमला कर दिया। प्लेट को पहले तोड़ा गया, उसके बाद उसे रगड़-रगड़कर नुकीला बनाया गया। आप खुद सोच सकते हैं कि एक प्लेट को इतना नुकीला बनाने में कितना समय लग सकता है कि वह जानलेवा हथियार के समान हो जाए। कम से कम 10-15 दिन तो चाहिए ही। अगर इतने दिनों से एक कैदी हथियार बना रहा था तो जेल प्रशासन क्या कर रहा था। इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। अतीत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

तीन साल भाग गए थे 8 कैदी
18 जनवरी 2012 को जिला कारागार के इतिहास का सबसे काला दिन था। इस दिन अल सुबह 8 हार्डकोर क्रिमनल जेल से फरार हुए थे। राजपुर निवासी विजय, प्रदीप सुरेंद्र, किलोड़हद निवासी राजबीर, पुगथला निवासी नरेश, बढ़मलिक निवासी प्रमोद, चमराड़ा निवासी जयबीर जेल से फरार होने में कामयाब हुए थे। बैरक नंबर 3ए और 3बी से लोहे की ग्रील इन्होंने कटर से काटी, इसके बाद बैरक की छत पर चढ़ कर कूदे थे। इसके बाद 20 फीट ऊंची दीवार रस्सी के जरिए फांदी और भाग निकले। हालांकि ये सभी आरोपी बाद में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए थे। वर्ष 2007 में भी तत्कालीन बोस्टल जेल से कुछ कैदी फरार हो गए थे।
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जेल के बाहर चली थी गोलियां, मरा था एक
3 जून 2014 को जिला कारागार के मुख्य गेट पर गोलियां चली थी। खरखौदा के रहने वाले राजीव पर पवन और सुमित निवासी भैंसवाल कलां ने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थी। राजीव की हत्या इसीलिए की गई थी क्योंकि 12 जनवरी 2014 को गुरदीप निवासी खानपुर की हत्या करने वाले राहुल का वह रिश्तेदार था। राहुल जेल में बंद था और उसी से मुलाकात कर लौट रहे राजीव की हत्या गुरदीप की मौसी के लड़के पंकज उर्फ पिंकू के इशारे पर की गई।

कई कैदी मर चुके हैं जेल में
जिला कारागार में ही कई कैदियों की मौत भी हो चुकी है। 18 जुलाई 2015 को कैदी सुंदर लाल की मौत हो गई थी। जिसके बारे में बताया गया था कि वो नशा करने का आदी था और एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद था। उससे पहले भी इसी वर्ष में एक अन्य कैदी की मौत हो चुकी है, जिसको लेकर विवाद भी हुआ था। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया था।

कई बार हुए झगड़े, मिले थे सिम
कारागार परिसर द्वंद युद्ध का अखाड़ा तो कई बार बन चुका है। कई बार तो मामले सामने आ जाते हैं, वहीं कई बार जेल प्रशासन की सक्रियता से मामले जेल की चारदीवारी के भीतर ही रह जाते हैं। ये ही नहीं जेल परिसर में इसी वर्ष की शुरूआत में मोबाइल सिम भी मिले थे। वर्ष 2012 में भी तत्कालीन एसपी अरुण सिंह ने औचक निरीक्षण किया था तो चार मोबाइल फोन और 6 सिम बरामद किए गए थे। इसके अलावा दो-तीन बार यहां पर कैदियों के कब्जे से नशीले पदार्थ भी बरामद किए जा चुके हैं।

2007 में गायब कर दिए थे 10 कैदी
वर्ष 2007 में 28 दिसंबर को तत्कालीन आईजी जेल एमएस मान ने सोनीपत जेल का औचक निरीक्षण किया था। रात को हुए औचक निरीक्षण में जेल से 10 कैदी गायब मिले थे। इस मामले में आईजी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जेल के 3 अधिकारियों को गिरफ्तार भी करवाया था। बैरक नंबर 27 और 16 से 5-5 कैदी गायब थे। जांच में पता चला था कि इन्हें गैरकानूनी तरीके से जेल से बाहर जाने दिया गया था।

जहां अपराधी रहेंगे वहां पर तरह-तरह की योजनाएं तो बनेंगी ही। अधिकतर अपराधी ईगो के कारण एक दूसरे से भिड़ जाते हैं। हम पूरी तरह से कोशिश करते हैं कि किसी तरह की समस्या न हो। समय-समय पर ऐसी एक्टिविटी भी करवाई जाती है, जिससे भाईचारा बढ़े। सुरक्षा को लेकर भी हम पूरी तरह से सतर्क हैं।
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-जयकिशन छिल्लर, जेल अधीक्षक, सोनीपत जेल
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