सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दाैरान पंजाब के लखबीर सिंह (35) की निहंगों ने एक पैर, हाथ काटकर शव पुलिस बैरिकेड पर लटका दिया था। शरीर पर 14 तलवार और भालों के निशान मिले थे। हत्या से जुड़े वीडियो तक वायरल किए गए थे। फिर भी अभियोजन की इतनी लचर पैरवी रही कि हत्यारोपी निहंग बरी हो गए।
15 अक्तूबर 2021 की सुबह दिल दहलाने वाली थी। किसान आंदोलन के मंच के पास पुलिस बैरिकेड पर तरनतारन जिले के चीमा खुर्द गांव निवासी लखबीर सिंह का पुलिस बैरिकेड पर उल्टा लटका शव मिला था। निहंगों का आरोप था कि लखबीर ने पवित्र ''सरबलोह ग्रंथ'' की बेअदबी का प्रयास किया, जिसके बाद उसे सजा दी गई।
इस मामले में 15 अक्तूबर की ही शाम को निहंग सरबजीत सिंह ने सरेंडर कर दिया था। 16 अक्तूबर को निहंग नारायण सिंह, भगवंत सिंह व गोविंद प्रीत सिंह ने भी हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने निहंगों की निशानदेही पर शव लटकाने के लिए इस्तेमाल रस्सी भी बरामद कर ली थी।
इसके बाद भी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र सरोए की अदालत में पुलिस आरोपियों को दोषी सिद्ध नहीं करा पाई। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में चारों निहंगों को बरी कर दिया। इससे पुलिस की जांच और अभियोजन की पैरवी दोनों ही कटघरे में है। वारदात के बाद से एक आरोपी अमन सिंह की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी। इस पर अदालत को उसे भगोड़ा घोषित करना पड़ा था।
पंजाब सरकार ने गठित की थी एसआईटी
सिंघु बॉर्डर पर बेअदबी के प्रयास के आरोप में कत्ल किए गए लखबीर सिंह की बहन राजविंदर कौर ने मामले में लखबीर को दिल्ली ले जाने वाले और उसकी हत्या की साजिश में शामिल लोगों को बेनकाब करने की गुहार लगाई थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की थी।