सास व सालों के पास भी गया पत्नी की शिकायत लेकर तो वहां भी मिली थी धमकी
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सेक्टर-15 में हुई दिल दहलाने वाली वारदात के बाद मिले सुसाइड नोट में पूरा मामला अवैध संबंध का होने का पता लगा है। जिसमें सतीश ने लिखा है कि वह अपनी सास व सालों के पास भी उसकी शिकायत लेकर गया था। इस पर उन्होंने उसे ही धमकी दे डाली थी। यहां तक की जब शिक्षिका ने अपने आरोपी प्रदीप महला को बताया तो उसने भी सतीश को जान से मारने की धमकी दी थी। जिससे आहत होकर उसने जघन्य कांड को अंजाम दे डाला।
सतीश खेती बाड़ी का काम करता था। उसकी शादी गांव पूठी में 17 साल पहले हुई थी। पत्नी से उन्हें दो बेटे भी हुए। आठ साल पहले पत्नी को शिक्षा विभाग में पीटीआई की नौकरी मिली थी। जिसके बाद वह अपने बच्चों के साथ गांव से बाहर आकर रहने लगा। वह पहले वर्धमान गार्डन के पास रहता था। वहां पर उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह होने लगा था। जिसके बाद वह चार माह पहले सेक्टर-15 में आकर रहने लगा। सतीश ने सुसाइड नोट में बताया है कि वह कुछ दिन पहले अपने बच्चों को छोड़ने के लिए ट्यूशन पर जा रहा था। बीच रास्ते से उसे वापस आना पड़ा। वापस आने पर उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी अन्य मर्द के साथ थी। जब उसने विरोध किया तो उस व्यक्ति ने खुद को चेयरमैन का पति बताते हुए उसे जान से मारने की धमकी दे दी थी। जिससे वह घबरा गया था।
सास व सालों को भी कराया अवगत
सतीश ने सुसाइड नोट में जिक्र किया कि उसने मामले से अपनी सास सालों को अवगत कराया था। उन्होंने भी उसकी कोई सुनवाई करने के बजाय उसे ही जान से मारने की धमकी दे दी थी। जिससे वह पूरी तरह से टूट गया था।
पत्नी के मोबाइल पर देखे मैसेज
सुसाइड नोट में आरोप लगाए गए हैं कि उसने अपनी पत्नी के मोबाइल पर प्रदीप के मैसेज देखे थे। जिसके बाद उसने अपनी पत्नी को फिर से टोका था। उसके बावजूद वह उसकी सुनने को तैयार नहीं थी। जिससे तंग आकर उसने वारदात को अंजाम दिया। साथ ही सतीश ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी मौत के बाद आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
खेती के साथ ईंट सप्लायर था सतीश
परिवार की हत्या के बाद आत्महत्या करने वाला सतीश किसान था। वह गांव में 10 एकड़ से अधिक जमीन की कास्त करता था। इसके साथ ही वह अपने चाचा रामकरण ठेकेदार के भट्ठों से ईंट लाकर सप्लाई करता था। रामकरण के गन्नौर क्षेत्र में चार भट्ठे हैं।
एक दिन पहले गया था गांव, नहीं किया परिजनों से जिक्र
परिजनों का कहना है कि सतीश शुक्रवार को भी गांव में गया था। वह ग्रामीण नफे सिंह के पौत्र जन्म पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने साथ ही बच्चे को आशीर्वाद देकर वहां से निकला था। तब भी उसने अपने परिजनों व किसी ग्रामीण से यह जिक्र नहीं किया कि वह टूट चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि सतीश बहुत नरम दिल था। वह किसी के साथ झगड़ा करना तो दूर झगड़ा होने पर कांपने लगता था।