प्रेम प्रसंग में हत्या के दो दोषियों को उमकैद
अमर उजाला ब्यूरो,
सोनीपत।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील गर्ग की अदालत ने प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या के मामले में दो साथियों को दोषी करार दिया है। दोषियों ने हत्या करने के बाद शव को गड्ढा खोदकर जमीन में दफना दिया था। अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में युवक की पत्नी को सबूतों के अभावों में बरी कर दिया गया।
गांव टांडा की सरपंच के पति विनोद कुमार ने 2 फरवरी, 2016 को थाना राई में शिकायत दी थी कि ग्रामीणों को मास्टर प्रताप नंबरदार के खेत में मिट्टी खुदी मिली थी। शक पर पुलिस को सूचना दी गई तो तत्कालीन राई थाना प्रभारी वजीर सिंह की टीम ने तहसीलदार और डीएसपी सुनील कुमार के मार्गदर्शन में घटनास्थल पर मिट्टी हटवाई थी। जिसके बाद गड्ढे में एक युवक का शव बरामद किया था। जांच में शव की शिनाख्त गांव टांडा के ही विनोद के रूप में हुई थी। राई थाना प्रभारी वजीर सिंह की टीम ने जांच की तो शक की सुई गांव के ही हरीश की तरफ उठने लगी थी। सामने आया था कि हरीश ही घटना के दिन विनोद को घर से बुलाकर ले गया था। जब पुलिस ने हरीश को काबू किया तो उसने विनोद की हत्या करना स्वीकार कर लिया था। हरीश ने पुलिस को बताया था कि विनोद की पत्नी माया के साथ उसके संबंध हैं। माया के साथ मिलकर ही उसने विनोद की हत्या का षड्यंत्र रचा था। इसमें उसने अपने साथी गांव जगदीशपुर निवासी सोनू को भी शामिल कर लिया था। उसने अपने साथी के साथ 1 फरवरी की रात को विनोद को खेतों की तरफ ले जाकर कस्सी से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। इससे पहले उन्होंने विनोद को शराब भी पिलाई थी। बाद में शव को यमुना के पास जमीन में दबा दिया था। पुलिस ने माया व सोनू को भी काबू कर लिया था। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त की गई कस्सी को भी बरामद कर लिया था।
यूं हुआ था खुलासा
विनोद की हत्या किए जाने के बाद परिजनों ने हरीश पर शक जताया था। विनोद के भाई राजेंद्र ने पुलिस को बताया था कि विनोद को दो दिन पहले गांव का ही हरीश घर से लेकर गया था। उसका भाई हरीश को अक्सर अपने घर आने से रोकता था। उसने शक जताया था कि विनोद की हत्या उसी ने की है। पुलिस जांच में शक सही निकला था।
अदालत ने दोनों साथियों को दी सजा
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए एएसजे सुशील गर्ग की अदालत ने हरीश व उसके साथी सोनू को दोषी करार दिया। अदालत ने सबूतों के अभाव में माया को बरी कर दिया। अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन-तीन माह अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी।