हरियाणा के सोनीपत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की अदालत ने एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में सुनवाई कर तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 साल कठोर कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर एक साल साधारण कैद की सजा भुगतनी होगी।
गांव खांडा निवासी दिलबाग सिंह ने 25 जुलाई 2015 को खरखौदा थाना में शिकायत दी थी कि उसके छोटे भाई रामफल (38) ने अपनी पत्नी कविता (32), बेटे निशांत (12) व बेटी निकिता (6) को अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार दी है। बाद में उसने स्वयं को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण प्रापर्टी को लेकर चल रहा विवाद बताया गया था।
पुलिस ने एक कमरे में खून से लथपथ रामफल की पत्नी कविता की लाश तो दूसरे कमरे में रामफल व उसके दोनों बच्चों निशांत व निकिता के शव बरामद किए थे। चारों को गोली लगी थी और पास ही रिवाल्वर भी पड़ा था। जांच में सामने आया था कि रामफल खरखौदा के थाना कलां चौक के पास दूध की डेयरी चलाता था।
रामफल ने कुछ युवकों से अपनी जमीन का सौदा किया था, जिन्होंने जमीन तो अपने नाम करा ली थी, लेकिन इसकी एवज में पैसे कम दिए थे। इतना ही नहीं युवक और जमीन देने का भी दबाव बना रहे थे। जिससे पिछले कई दिनों से वह परेशान था। उसने इसी के चलते घटना को अंजाम दिया था।
भाई दिलबाग के बयान पर पुलिस ने मामले में एक रजिस्ट्री क्लर्क के साथ नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जिनमें रामपुर निवासी सुनील उर्फ काला, कुंडल निवासी संजय और मंजीत था। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
मामले में सुनवाई के बाद एएसजे शैलेंद्र सिंह की अदालत ने सुनील, संजय व मंजीत को दोषी करार दिया। अदालत ने मंगलवार को तीनों दोषियों को भादंसं की धारा 306 में 10-10 साल की कठोर कैद व 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।