एक तरफ जहां एसडीएम ई-दिशा केंद्र के भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए नए-नए कदम उठा रहे हैं, वहीं अरसे से सक्रिय दलाल उनके प्रयासों पर पानी फेरने में जुटे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एसडीएम निशांत यादव ने फीस की सूची ई-दिशा केंद्र के बाहर नोटिस बोर्ड पर चस्पा कराई थी, लेकिन दलालों ने बोर्ड से छेड़छाड़ कर फीस 300 से 900 रुपये कर दी। एसडीएम का कहना है कि अगर ऐसा हुआ है तो पहले बोर्ड ठीक कराएंगे और इसके बाद छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। इसी के चलते अधिकारियों को सख्त हिदायत है कि भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा जाए। इसी कड़ी में एसडीएम निशांत यादव ने आते ही ई-दिशा केंद्र में आ रही भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते आवश्यक कदम उठाए। सबसे पहले हर तरह के ड्राइविंग और कंडक्टर लाइसेंस से लेकर वाहनों के पंजीकरण की फीस विस्तार से केंद्र के बाहर बोर्ड लगाकर सार्वजनिक की। ताकि कोई भी दलाल आम लोगों को मूर्ख नहीं बना सके।
नहीं किसी से बात करने की जरूरत, हर खिड़की की कुंडली ओपन
एक सप्ताह पहले एसडीएम ने केंद्र के बाद दूसरा बोर्ड लगाया है, जिसमें बताया गया है कि एक अनजान व्यक्ति बोर्ड को पढ़कर आसानी से पता कर सकता है कि उसका लाइसेंस कैसे बनेगा। कौन सी खिड़की पर कौन सा कार्य होगा।
एक ही दिन में होगी प्रक्रिया पूरी
बोर्ड पर 13 खिड़कियों का विवरण दिया गया है। बताया गया है कि पहली खिड़की पर टोकन नंबर मिलेगा। एक दिन में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। खिड़की नंबर-11 पर मौजूद कर्मचारी बताएगा कि किस दिन लाइसेंस मिलेगा।
भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए ई-दिशा केंद्र के बाहर दो-दो बोर्ड लगाकर पूरी प्रक्रिया ओपेन की गई है। आम आदमी को किसी बाहरी व्यक्ति से बात करने की जरूरत नहीं। दूसरा, फीस बोर्ड पर अगर किसी ने छेड़छाड़ की है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे कल की जांच कराते हैं।
-निशांत यादव, एसडीएम