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रजिस्ट्री के लिए रुपये मांगने की शिकायत पर शासन ने विजिलेंस से मांगी रिपोर्ट, डीआरओ ने भी तहसीलदार की जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपी

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सोनीपत। तहसील में भ्रष्टाचार के मामले में सोनीपत पर सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। रजिस्ट्री के नाम पर रुपये मांगने की युवा भाजपा नेता की शिकायत के बाद शासन ने विजिलेंस से पूरी रिपोर्ट मांगी ली। जिस पर विजिलेंस ने शिकायत कर्ता युवा भाजपा नेता साहिल ग्रोवर के बयान दर्ज करके शासन को रिपोर्ट भेज दी है। अपने बयान में साहिल ग्रोवर ने रजिस्ट्री कराने जाने वाले दिन की क्लर्क व तहसीलदार से हुई बातचीत को बताया है और उसमें रुपये मांगने से लेकर बड़े नेता तक रुपये पहुंचाने की बात कहने का आरोप लगाया है। इसके अलावा तहसीलदार के खिलाफ शिकायतों के मामले में डीआरओ ने जांच में तेजी पकड़ी है और दो जांच की रिपोर्ट डीसी को भेजी हैं। डीसी ने रिपोर्ट देखने के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
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भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य साहिल ग्रोवर एक सप्ताह पहले रजिस्ट्री कराने के लिए सोनीपत तहसील में गए थे। उसका आरोप था कि तहसील कर्मी ने उससे प्लॉट के कागज देखकर 18 हजार 500 रुपये मांगे तो साहिल ग्रोवर अपनी शिकायत लेकर तहसीलदार के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई। साहिल ग्रोवर ने आरोप लगाया कि तहसीलदार ने उससे रुपये देने के बाद काम जल्दी होने की बात कही। यह सुनकर उसने रिकार्डिंग करने के लिए मोबाइल निकाला तो उसे मोबाइल तोड़ने की धमकी देते हुए किसी भी जगह शिकायत देने की धमकी दी गई। साहिल ग्रोवर के अनुसार उसे यहां तक कहा गया कि वह एक बड़े नेता को सीधे रुपये भेजते हैं, इसलिए उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। भाजपा नेता साहिल ग्रोवर ने बाहर आकर सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को ट्वीट करके पूरे मामले की शिकायत की थी। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो शासन ने विजिलेंस से शुक्रवार को पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी। भाजपा नेता साहिल ग्रोवर ने विजिलेंस को अपने बयान दर्ज कराए, जिसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही जा रही है।
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भाजपा नेता ने यह बयान दर्ज कराए
युवा भाजप नेता साहिल ग्रोवर को विजिलेंस में बुलाया गया और उसके बयान दर्ज किए गए। साहिल ने लिखित में बयान दर्ज कराते हुए बताया कि वह अपने एक साथी के 100 गज के प्लाट की रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील कार्यालय में गया था। जहां रजिस्ट्री क्लर्क ने टोकन देने के समय उससे 18 हजार 500 रुपए मांगे। इस पर वह तहसीलदार के पास गया और वहां पर अपनी बात रखी तो तहसीलदार ने उसे पैसे देने पर काम जल्दी होने की बात कहकर समझाया। उसने वीडियो बनाने के लिए फोन निकाला तो तहसीलदार ने उसके साथ दुर्व्यवहार करते हुए फोन तोड़ने की धमकी दी। तहसीलदार ने यह भी कहा कि उसका कुछ नहीं हो सकता, क्योंकि वह ऊपर (एक बड़े नेता का नाम लेते हुए) पैसे पहुंचाता है।
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डीआरओ ने मारपीट व भ्रष्टाचार मामले में डीसी को भेजी जांच रिपोर्ट
तहसीलदार पर पिछले कुछ समय में एक दर्जन आरोप लग चुके हैं और इसकी शिकायत अधिकारियों के साथ ही सीएम विंडो पर हो चुकी है। जिससे सरकार की खूब बदनामी हो रही है। इन शिकायतों में कई की जांच डीआरओ राजकुमार कर रहे हैं, जिनमें से दो मामलों की रिपोर्ट डीआरओ ने डीसी श्यामलाल पूनिया को सौंपी है। डीआरओ ने जमीन की रजिस्ट्री करने के भ्रष्टाचार के मामले की रिपोर्ट डीसी को सौंपी है तो सड़क सुरक्षा संगठन के कार्यकर्ता के साथ मारपीट करने की शिकायत की जांच रिपोर्ट भी डीसी को सौंपी है। दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट में तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर सवाल लगाए गए हैं, जिससे उसपर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है। डीसी ने सोमवार को जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
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डीआरओ से दो जांच रिपोर्ट मिली हैं और दोनों रिपोर्ट को मार्क कर दिया गया है। उनको अभी पढ़ा नहीं गया है और उनको पढ़ने के बाद देखा जाएगा कि उसमें आगे किस तरह की कार्रवाई की जानी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-श्यामलाल पूनिया, डीसी
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मुझ पर सभी आरोप गलत और यह भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाते हुए लगाए जा रहे हैं। मैने किसी को कुछ नहीं कहा है और रुपये मांगने के अलावा ऊपर तक पहुंचाने वाले आरोप भी गलत लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग मिलकर मुझे बदनाम करने में लगे हुए हैं।
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-विकास मलिक, तहसीलदार
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