सोनीपत। कोरोना से बचाव के लिए 14 अप्रैल तक किए लॉकडाउन के दौरान सभी प्रतिष्ठान व कंपनी बंद कर दी गई हैं। ऐसे में कंपनी में कार्यरत मजदूर वर्ग के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। कंपनी में खाना तक नहीं मिलने के चलते अब मजदूर वर्ग के लोग पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़ेे हैं। बेशक कोई अपने घर से 200 किलोमीटर दूर है तो कोई 300 किलोमीटर, लेकिन उसके बावजूद वह अपने प्रदेश के लिए बिना किसी संसाधन के निकल पड़ा है। कई मजदूर तो बच्चों व महिलाओं संग पैदल निकल लिए हैं। जिसके चलते हाईवे के साथ ही केजीपी और केएमपी पर मजदूरों की कतार लगी है। अब प्रशासन ने हाईवे पर तीन ठिकानों पर प्रवासी मजदूरों के रहने व खाने का बंदोबस्त किया है। यहां इनको रोकने के भी प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन भय और संशय के बीच यह लोग यहां ठहरने को तैयार नहीं।
शनिवार को सुबह से ही हाईवे व केजीपी और केएमपी पर लोग पैदल ही चलते दिखाई दिए। 50-100 मीटर की दूरी पर लोग चार-पांच की संख्या में टोलियों के सिर पर सामान की गठरी या बैग के अलावा बच्चे कभी कंधे पर तो कभी पैदल ही चलते दिखाई दिए। हाईवे पर अचानक काफी भीड़ आ गई। मजदूर सोनीपत के साथ ही पडोस के जिलों से पैदल चलकर यहां तक पहुंचे थे। इनमें सेे किसी को उत्तर प्रदेश जाना है तो कोई मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार व राजस्थान जा रहा है। मजदूर वर्ग 200 से 500 किलोमीटर का सफर पैदल या किसी अन्य वाहन के भरोसे तय करने के लिए निकले हैं। सोनीपत से करीब 280 किलोमीटर दूर बदायूं जाने के लिए रामजस, सुधीर और मोहन का कहना था कि फैक्टरी में काम बंद हो गया। ऐसे में दिल्ली में रह रहे कंपनी मालिक ने खाना देने से मना कर दिया। ऐसे में उन्हें भूखा मरने से अच्छा अपने घर जाना लगा और अब वह घर से निकल गए हैं। सोनीपत के बहालगढ़ से करीब 525 किलोमीटर यूपी के गोंडा के निकले कार्तिक, सोहन और मनोज का कहना था कि जो पैसा मिला था वह तो खत्म हो गया। वह निर्माणाधीन कंपनी में लोहे का काम करते थे। अब काम बंद है। ऐसे में पैसा कहां से आएगा। जिसके चलते भूखा मरने की नौबत आ गई है। भूमि की गुणवत्ता की जांच करने वाले बिहार के अकरम व उसके साथियों ने बताया कि वह बहालगढ़ कंपनी में आए थे। अचानक लॉकडाउन हो गया। कंपनी मालिक ने मदद करने से इंकार कर दिया। जिसके चलते अब पैदल ही निकल लिए हैं। यहां से दिल्ली जाएंगे। उसके बाद आगे कहां यह कुछ उन्होंने नहीं सोचा है।
पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले पुरुषोत्तम कहते हैं कि वह हिसार के सौरखी स्थित टीएम कंपनी में हैल्पर का कार्य करते हैं। लॉकडाउन होने के कारण कंपनी में उसके साथ काम करने वाले लोग इधर-उधर चले गए हैं। जिस कारण उसे अब खाने की परेशानी होने लगी तो उसने पैदल ही अपने घर जाने की ठान ली। अब निकल लिए हैं तो मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। वह दो दिनों तक पैदल चलकर शनिवार दोपहर को सोनीपत पहुुंचा है। यहां पुलिसकर्मियों ने उससे सड़क पर घूमने का कारण पूछा और उसकी मदद करते हुए ट्रक में बैठाकर जीटी रोड पर पहुंचवाया। यूपी के इटावा के रहने वाले चार श्रमिकों ने भी अपनी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास शुरू कर दिया है। संदीप ने बताया कि वह अपने साथी सुरेश, राजबीर व टोनी के साथ औद्योगिक क्षेत्र स्थित चॉकलेट बनाने वाली फैक्टरी में नौकरी करते हैं। लेकिन खाने की परेशानी के चलते अब घर का रुख कर लिया है। सोनीपत से करीब 650 किलोमीटर दूर अयोध्या के लिए निकले सुधीर, अंकुर व रजनीश का कहना है कि वह कंपनी में काम करते थे। अब काम बंद है। दूसरा प्रदेश होने के चलते उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में अपने घर की तरफ रुख कर लिया है। जहां तक पैदल होगा पैदल चलेंगे और कोई वाहन मिला तो उसमें बैठकर आगे का सफर पूरा करेंगे।
-----
बहालगढ़ स्थित कंपनी में काम बंद हो गया है कंपनी का मालिक फोन नहीं उठा रहा है। खाने के लाले हो गए हैं। अब भूखा मरने से अच्छा है कि अपने परिवार के साथ ही रहें। इसके लिए चले दिए हैं। अब नहीं तो दस दिन में पहुंच जाएंगे। कम से कम अपनों के साथ तो रहेंगे।
लालू, गोंडा यूपी
मुरथल के पास कंपनी में काम करता था। अब काम बंद हो गया। साथ रहने वाले सभी चले गए। अब अकेले रहने में दिक्कत आ रही है। परिवार के लोग भी चिंता कर रहे हैं। ऐसे में पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़ा हूं। किस्मत में होगा तो पहुंच जाउंगा, नहीं तो देखा जाएगा साहब।
-पवन, राजस्थान
परिवार के आठ लोग गन्नौर में मेहनत मजदूरी कर रहे थे। अब काम नहीं रहा तो भूखों मरने की नौबत हो गई है। जिसके चलते बच्चों संग अपने घर के लिए निकल पड़े हैं। वहां कम से कम खाने को तो मिल जाएगा। राशन भी महंगा हो गया है। जिसके चलते घर जाना ही बेहतर समझा। अब देखते है कि क्या मदद मिल पाएगी।
रामदेवी, झांसी
परिवार में चार बच्चे व पति-पत्नी हैं। खाने को सामान नहीं मिल रहा है। मजदूरी भी नहीं लगी है। ऐसे में भूख से मरने की नौबत आ गई है। जिसके चलते अब अपने घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। खाना महंगा होने से आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है। परिवार के साथ रहेंगे तो कुछ दिक्कत कम होगी। अब निकल लिए हैं तो रास्ते में जो होगा देखा जाएगा।
श्रवण कुमार, मध्यप्रदेश
---
प्रशासन ने मजदूरों के रहने और खाने का पूरा बंदोबस्त किया है। लोगों से आग्रह भी किया गया, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं। ऐसे में प्रशासन ने इनके लिए जगह-जगह लंगर लगाए और सैनिटाइजर की व्यवस्था कराई है। साथ ही पुलिस को हिदायत दी है कि वह गश्त लगातार करें, ताकि किसी के साथ कोई हादसा ना हो। प्रशासन हर स्तर पर मदद के लिए तैयार है।
आशुतोष राजन, एसडीएम सोनीपत।
रामदेवी।- फोटो : Sonipat
केएमपी के रास्ते यूपी की तरफ जाते मजदूरों की कतार।- फोटो : Sonipat
केएमपी के रास्ते यूपी की तरफ जाते मजदूर।- फोटो : Sonipat