भारत की संस्कृति में निरंतरता है जिसे कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। विश्व में कोई भी ऐसी ताकत नहीं है जो भारत की हस्ती को मिटा सके। भारत को सपेरों और पाखंडियों का देश कहकर गलत तरीके से इतिहास में प्रस्तुत किया गया जबकि वास्तविकता यह है कि भारत अन्य देशों की तरह राजनैतिक राष्ट्र नहीं है। इसका जन्म किसी राजा द्वारा नहीं किया गया है बल्कि भारत ने संतों की तपस्या से जन्म लिया है। इसलिए हमारा राष्ट्र कभी समाप्त नहीं हो सकता। चाहे कोई भी राजा हो और वह कितने ही प्रयास कर ले। यह बात राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डिक्रस्ट) में शनिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही।
अपने अध्यक्षीय भाषण की शुरुआत करते हुए प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि वे भाषण देने नहीं आए हैं, बल्कि आशीर्वाद देने आए हैं। इसीलिए अपनी मन की बात रखेंगे। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए देशप्रेम की सीख दी। उन्होंने कहा कि जो युवा स्वामी विवेकानंद के बारे में नहीं जानता वो युवा भारतीय नहीं है। अपने भाषण में वे अपने हिंदी भाषा के प्रेम को भी नहीं रोक पाए और उन्होंने कहा कि राष्ट्रभाषा में भावनाओं का समावेश होता है जबकि अंग्रेजी भाषा केवल बुद्धि तक सीमित रहती है और हृदय से उसका मिलान नहीं हो पाता। इस संबंध में उन्होंने मां और बहन जैसे शब्दों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि उनका लिखित भाषण तो अंग्रेजी में है लेकिन वे हिंदी में इसलिए भाषण देना चाहते हैं कि उनके शब्द युवाओं के दिलों को छू जाएं। दीक्षांत समारोह में पहली बार 7 पूर्व छात्रों को एलुमिनी अवार्ड दिया गया। जबकि 32 छात्रों को गोल्ड मेडल और मेरिट सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया। 13 को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस मौके पर दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी दहिया ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समारोह में मुख्यातिथि के तौर पर शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा, विशिष्ट अतिथि के तौर पर कविता जैन ने भी शिरकत की। दीक्षांत भाषण आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक पद्मश्री केएल चोपड़ा ने दिया।
यह भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड की चेयरपर्सन कृष्णा गहलावत, राज्यपाल की सचिव एवं अंबाला मंडलायुक्त नीलम प्रदीप कासनी, रजिस्ट्रार आरके अरोड़ा, उपायुक्त राजीव रतन, पुलिस अधीक्षक अभिषेक गर्ग, अतिरिक्त उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा, एसडीएम निशांत यादव, एमडीयू के कुलपति प्रो. बीके पूनिया, बीपीएस खानपुर की कुलपति प्रो. आशा कादियान, रजिस्ट्रार कविता शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी परमेश्वरी हुड्डा, प्राचार्या संतोष राठी, मोहनलाल बड़ौली, मनिंद्र सन्नी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
हजारों वर्षों से पेटेंट हैं संस्कार और संस्कृतिः रामबिलास
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और संस्कृति हजारों वर्षों से भारत के पेटेंट रहे हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि उन्हें न केवल समय के महत्व को समझना होगा बल्कि मंजिल भी तय करनी होगी। हमारे शरीर में मन आत्मा और अनुभूति एक है तो मंजिल भी एक ही होनी चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दो विचारधाराओं में टकराव वाले लोगों के जीवन में बाधाएं आती हैं। शर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को संस्कारयुक्त बनाती है इसलिए प्रत्येक डिग्रीधारी के व्यवहार से इसका आभास होना चाहिए। आगे बढ़ना ही हमारी नियति है और जीवन में निराशा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। भारत में गुरू का बड़ा महत्व है और हम सभी को इस परंपरा को बनाए रखना होगा।
दीक्षांत शब्द ही अच्छी भावनाओं का अहसासः जैन
महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री कविता जैन ने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी और कहा कि दीक्षांत शब्द ही अपने आपमें अच्छी भावनाओं का अहसास कराता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के जीवन में यह दिन बेहद महत्वपूर्ण और यादगार दिन होता है इसलिए इस दिन के बाद छात्र अपने जीवन के दूसरे पड़ाव में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बड़ा पैकेज युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए रोकता है: केएल चोपड़ा
समारोह में दीक्षांत भाषण देते हुए आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक पद्मश्री केएल चोपड़ा ने कहा कि इंजीनियरिंग करने के बाद युवा बड़ा पैकेज लेकर नौकरी के लिए चले जाते हैं। इसी पैकेज के चक्कर में वह उच्च शिक्षा की तरफ रुख नहीं करते। ऐसे में अगर युवा उच्च शिक्षा हासिल नहीं करेंगे तो उनके बच्चों के लिए शिक्षक कहां से आएंगे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सलाह देते हुए कहा कि आप जहां हो वहां अपने व्यक्तित्व के अनुसार कार्य करो। किसी से प्रभावित होने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति में एक अलग प्रतिभा होती है। आप जिस भी संस्था में काम करो उसके प्रति ईमानदार और पारदर्शी रहें। उन्होंने कहा कि जहां भी आप काम करें वहां पर ऐसे पदचिह्न छोड़ें जो आने वाले लोगों को प्रेरित करें। कड़ी मेहनत का संदेश का देते हुए उन्होंने कहा कि अपने लक्ष्य को निर्धारित कर आगे बढ़ो और नेतृत्व की क्षमता पैदा करो।