सोनीपत। सेक्टरों के एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मुख्य प्रशासक ने री-कैल्कुलेशन को गलत बताते हुए दोबारा कराने के आदेश दिए हैं। इस री-कैल्कुलेशन में कोर्ट के आधार पर अलग-अलग ब्याज लगाने की जगह सुप्रीम कोर्ट की एन्हांसमेंट के आधार पर सिविल कोर्ट में दायर केस के समय से ब्याज लगाने के लिए कहा जा रहा है। जिससे री-कैल्कुलेशन में कम हुई एन्हांसमेंट की राशि कम होने की जगह बढ़नी तय है। जिससे ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी भड़क गए हैं और री-कैल्कुलेशन को सीएम मनोहर लाल की ओर से बनवाई गई पॉलिसी के तहत होने की बात कही है। इसके साथ ही कहा गया है कि अगर इस तरह से नियमों के खिलाफ री-कैल्कुलेशन कराई जाती है तो प्लॉटधारक आंदोलन शुरू करेंगे।
प्रदेश के सभी जिलों के सेक्टरों में वर्ष 2017 से पहले प्लॉटधारकों को एन्हांसमेंट भेजी गई थी। वह एन्हांसमेंट काफी ज्यादा भेज दी गई थी, जिसके विरोध में सेक्टरों के लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। इस मामले को लेकर ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी सीएम, प्रमुख सचिव, मुख्य प्रशासक से मिले थे। वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एन्हांसमेंट को गलत बताया था और कहा था कि सेक्टरों में जितने भी स्कूल, पुलिस चौकी, वाटर वर्क्स, हुडा कार्यालय समेत अन्य सरकारी भवन बने हुए हैं, उनकी एन्हांसमेंट भी प्लॉट धारकों पर डाल दी गई है। इसके अलावा सेक्टरों में एन्हांसमेंट के आदेश कोर्ट से कई साल पहले हो गए थे, जबकि प्लॉट धारकों को नोटिस कई साल बाद ब्याज लगाकर भेज दिए गए थे। इस तरह वह ब्याज गलत लगाया गया था और इस कारण ही एन्हांसमेंट इतनी बढ़ गई थी कि वह प्लॉट की कीमत से ज्यादा हो गई थी। इस पूरे मामले में सीएम मनोहर लाल ने री-कैल्कुलेशन कराने के आदेश दिए थे, जिसके लिए पॉलिसी बनाई गई थी और उसके आधार पर री-कैल्कुलेशन एक साल पहले शुरू हुई थी। इस री-कैल्कुलेशन की फाइल तैयार करके जोनल कार्यालय रोहतक में भेजा गया था, जहां जोनल प्रशासक व ऑडिटर ने पूरा ड्राफ्ट भी तैयार कर दिया था। रोहतक जोनल कार्यालय में इस समय बहादुरगढ़ के सेक्टर 9, 9ए व 2, झज्जर के सेक्टर 6, 9ए व बी, रोहतक के सेक्टर 1, 4 एक्सटेंशन, 5, 6 व 3, पानीपत के सेक्टर 18, 6, 7, 8, 24 और सोनीपत के सेक्टर 14 व 15 पार्ट एक की फाइल है। इसको लेकर ही एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक ने रोहतक प्रशासक के अलावा सभी जिलों के एस्टेट ऑफिसर व सीए के साथ बैठक की। ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के महासचिव मोहन सिंह मनोचा के अनुसार वहां मुख्य प्रशासक ने पॉलिसी के तहत की गई री-कैल्कुलेशन को गलत बताते हुए नए तरीके से उसे दोबारा करने के लिए कहा है। जिससे री-कैल्कुलेशन में राशि कम होने की जगह बढ़ जाएगी। इस तरह से सेक्टर के प्लॉटधारकों को परेशान करने का आरोप आरडब्ल्यूए ने लगाया है और इस मामले में पहले सीएम से मिलकर बात करके स्थिति साफ की जाएगी। उसके बाद भी पॉलिसी को नजर अंदाज किया जाता है तो आरडब्ल्यूए व सेक्टर के लोग आंदोलन शुरू करेंगे।
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इस तरह भेजे जाते हैं एन्हांसमेंट के नोटिस
जब सेक्टर के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो जमीन मालिक को प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। उसके बाद जमीन मालिक सिविल कोर्ट में केस करता है और वहां से एन्हांसमेंट आने पर उस राशि पर केस के समय से फैसले तक का ब्याज लगाकर प्लॉटधारकों को नोटिस भेजा जाता है। जिससे प्लॉट धारक जमा कर सकें। उसके बाद भी किसान असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट में चला जाता है तो वहां से एन्हांसमेंट आती है तो सिविल कोर्ट की एन्हांसमेंट राशि को उसमें से कम करके हाईकोर्ट में दायर किए गए केस के समय से फैसले तक के समय का ब्याज लगाकर नोटिस भेजे जाते हैं। इस तरह ही सुप्रीम कोर्ट से जारी एन्हांसमेंट में होता है, जिसमें से सिविल कोर्ट व हाईकोर्ट से जारी एन्हांसमेंट की राशि को कम करके बाकी पर ब्याज लगाकर नोटिस जारी किए जाते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की एन्हांसमेंट पर शुरूआत से ब्याज लगाने को कहा जा रहा
ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के महासचिव मोहन सिंह मनोचा ने बताया कि री-कैल्कुलेशन को पॉलिसी के तहत ही किया गया है और सुप्रीम कोर्ट से जारी एन्हांसमेंट से सिविल कोर्ट व हाईकोर्ट की एन्हांसमेंट को कम करके बाकी पर ब्याज लगाकर नोटिस जारी किए गए थे। उसके आधार पर री-कैल्कुलेशन की गई है। आरोप है कि अब सुप्रीम कोर्ट से जारी एन्हांसमेंट पर सिविल कोर्ट में दायर किए गए केस के समय से ब्याज लगाकर री-कैल्कुलेशन करने के लिए कहा जा रहा है जो पूरी तरह से गलत है। क्योंकि प्लॉट धारक सिविल कोर्ट व हाईकोर्ट की एन्हांसमेंट पहले ही भर चुके हैं। इसके साथ ही कई सेक्टरों की सुप्रीम कोर्ट की एन्हांसमेंट आई भी नहीं है तो ऐसे में उन सेक्टरों में सिविल कोर्ट व हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर एन्हांसमेंट नोटिस भेजना भी गलत है। इसको लेकर ही विवाद शुरू होता दिख रहा है।
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सेक्टरों के एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन की फाइलों को तैयार कर लिया गया था, जिनको मीटिंग में मुख्य प्रशासक के सामने रखा गया। री-कैल्कुलेशन को दोबारा से कराने के लिए कहा गया है, लेकिन पहले केवल दो सेक्टरों की फाइल भेजने के लिए मुख्य प्रशासक ने कहा है। जिनमें एक फाइल पुरानी री-कैल्कुलेशन के आधार पर होगी और दूसरी को मुख्य प्रशासक के बताए अनुसार री-कैल्कुलेशन करके भेजा जाएगा। उसके बाद वहां से स्थिति साफ की जाएगी कि री-कैल्कुलेशन दोबारा से कराई जाएगी या पहले कराई गई री-कैल्कुलेशन ही रहेगी। -वीरेंद्र हुड्डा, प्रशासक एचएसवीपी