सोनीपत। गन्नौर खंड के गांव मोई माजरी में बनी प्राचीन जैव विविधता बणी पर इन दिनों संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ग्राम पंचायत माजरी ने बणी के अधिकतर हिस्से में खड़े प्राचीन वृक्षों को कटवाने के लिए ठेकेदारों से मिलकर बोली करवाने की तैयार कर ली है। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध किया है।
शुक्रवार को कुछ ग्रामीण एकत्रित होकर लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त को मांगपत्र सौंपतक प्राचीन बणी को बचाने की गुहार लगाई। ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन ने शुक्रवार को होने वाली बोली को रुकवा दिया है।
गांव माजरी में करीब 57 एकड़ भूमि पर प्राचीन समय से बणी बनी हुई है। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के प्राचीन वृक्ष व झाड़ियां हैं। इनमें राज्य पक्षी तीतर को मिलता है। इसमें एक बड़ा और कई छोटे तालाब बने हुए हैं। ग्रामीण यहां पशुओं को चराने के लिए लाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ सालों से इस बणी के पेड़ों को काटने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम पंचायत भी बणी के अधिकतर हिस्से को खत्म कर कृषि योग्य भूमि में लाना चाहती है।
सुंदर बणी विलुप्त न हो जाए, इसे बचाना जरूरी : संत गोपाल दास
संत गोपाल दास ने कहा कि बणी गांव की आन-बान-शान है। यह जैव विविधता प्राकृतिक धरोहर है। मौजूदा सरपंच ने साल 2018 में बणी को बचाने के लिए खुद आवेदन किए थे।आज कटवाने पर आमादा हैं। इसके पीछे गांव का रेवेन्यू बढ़ाने का तर्क दिया जा रहा है।उन्हाेंने अपने आवेदन में कहा था कि अगर बणी में खड़े प्राचीन वृक्षों को काटा जाता है तो पर्यावरण को बड़ा नुकसान होगा।
संत गोपालदास ने कहा कि उपायुक्त से इस विषय पर चर्चा की है। उन्होंने सकारात्मक आश्वासन दिया है। मैं सरकार ने अपील करता हूं कि जो पहले से अभ्यारण बने हुए हैं, उन्हें बचाने का प्रयास करें।
गांव के विकास के लिए उठाया कदम : सरपंच
गांव माजरी के सरपंच कपिल राणा ने बताया कि गांव में करीब 57 एकड़ जमीन पर बणी है, जो शामलात भूमि पर है। गांव के विकास और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए इस बणी में से 20 एकड़ छोड़कर शेष को खेती के इस्तेमाल में लाने की योजना है। ग्रामीणों से बातचीत कर ही यह योजना तैयार की गई है। गांव के दो तीन घरों को इससे आपत्ति है। इसका कारण बणी के साथ लगती उनकी जमीन है।
गांव माजरी में प्राचीन बणी में खड़े पेड़ों की शुक्रवार को बोली की जानी थी। ग्रामीणों के विरोध के कारण उसे रुकवा दिया है। मौके का निरीक्षण किया जाएगा। उसके बाद ही आगामी निर्णय लिया जाएगा। -पूनम चंदा, बीडीपीओ, गन्नौर
फोटो 21- गांव माजरी में प्राचीन बणी का विहंगम दृश्य। स्रोत : ग्रामीण