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दावा : उद्योगों को 24 घंटे मिलेगी बिजली, बंद होंगे डीजल जनरेटर

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सोनीपत। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में अब डीजल जनरेटरों का शोर नहीं सुनाई देगा। एक अक्तूबर से ग्रेडेट रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू किया जा रहा है, जिसके बाद डीजल जनरेटर पर पाबंदी लग जाएगी। हालांकि जिला प्रशासन व बिजली निगम ने ग्रैप के नियमों से पार पाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसके तहत उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए कुंडली क्षेत्र में दो नए बिजली घर स्थापित किए हैं, जिन पर मुरथल, राई व कुंडली के उद्योगों का अतिरिक्त लोड शिफ्ट किया जा चुका है, जिससे उद्योगों को पर्याप्त बिजली मिलने लगी है। हालांकि बिजली निगम की तरफ से की गई यह व्यवस्था कितने दिन तक प्रभावी रहती है। इसका खुलासा तो ग्रैप नियमों के लागू होने के बाद ही हो सकेगा। बहरहाल बिजली के लगने वाले कटों में कमी आने से उद्योगपतियों ने राहत महसूस की है।
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दिल्ली में लगातार बिगड़ती जा रही आबोहवा में सुधार लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में एक अक्तूबर से ग्रैप नियम लागू किए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कड़े फैसले लिए गए थे, जिनके तहत उद्योगों या अन्य कार्याें में डीजल जनरेटर पर पूरी तरह से प्रबंध लगाने का भी निर्णय लिया गया था। सोनीपत में उद्योगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण उद्योगपतियों ने सवाल उठाया था कि डीजी सैट पर पाबंदी के बाद आखिर उद्योगों को किस आधार पर चलाया जा सकेगा। ऐसे में जिला प्रशासन ने उद्योगों के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवाने की दिशा में दो माह पहले काम शुरू कर दिया था, जिसका धरातल पर असर भी नजर आने लगा है।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने कुंडली क्षेत्र में दो नए बिजली घर स्थापित किए हैं, जिनकी क्षमता 132-132 केवी की है। इन बिजली घरों के माध्यम से उद्योगों में बिजली आपूर्ति सुचारू की जा सकेगी। कुछ दिन से इसका असर भी दिखने लगा है। गत सप्ताह से कुंडली व राई के उद्योगों में पर्याप्त बिजली मिल पा रही है।
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यह रहेंगे नए नियम
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार औद्योगिक इकाइयों में एलपीजी, नेचुरल गैस व विभिन्न प्रकार की गैस के प्रयोग को लेकर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 19 किलोवाट तक के डीजल जनरेटर पर कोई प्रतिबंध नहीं है। 19 से 125 किलोवाट तक के डीजल सेट को ड्यूल फ्यूल मोड पर करवाना अनिवार्य है। इसमें 70 फीसदी गैस व 30 फीसदी डीजल का प्रयोग होगा। ग्रैप नियम की अवधि में ऐसे डीजल सेट को दो घंटे तक चलाया जा सकेगा। 800 किलोवाट के डीजल सेट औद्योगिक इकाइयों में ही प्रयोग किए जाते हैं, जिनमें कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग अथॉरिटी (सीएक्यूएम) सिस्टम लगवाना अनिवार्य है। इससे संबंधित उद्योग को नियमों में छूट मिल जाएगी। 800 किलोवाट से अधिक के डीजल सेट को ग्रैप टाइमिंग में दो घंटे ही चलाने की अनुमति मिलेगी। इसके लिए सीएक्यूएम व रेट्रो फिटिंग सिस्टम लगवाना होगा।
बोले उद्योगपति
कम हुए हैं बिजली कट
प्रशासन व बिजली निगम के इंतजामों का असर अब नजर आने लगा है। कुछ दिनों से कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में बिजली के कट पहले की अपेक्षा काफी हद तक कम हुए हैं। उद्योगों को यदि इसी प्रकार पर्याप्त बिजली मिलती रहे तो डीजी सैट पर अतिरिक्त खर्च क्यों करेंगे।
सुभाष गुप्ता, प्रमुख, कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन

पर्याप्त बिजली मिले तो जनरेटर की जरूरत ही नहीं
कुछ दिनों से उद्योगों को मिलने वाली बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ है। ऐसे ही पर्याप्त बिजली मिलती रहे तो उन्हें जनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। जनरेटर चलाने से बिजली के मुकाबले लागत भी चार गुणा तक बढ़ जाती है। उद्योग ग्रैप अवधि के प्रतिबंधों के लिए तैयार हैं।
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राकेश देवगन, प्रमुख, राई औद्योगिक एसोसिएशन
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