शहर की बदहाल सीवरेज व्यवस्था ने लोक अदालत को भी झकझोर दिया है। सोनीपत सुधार समिति की जनहित याचिका पर अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर कब सीवरेज व्यवस्था सुधरेगी। यहीं हालात रहे तो क्यों न आपका वेतन रोक दिया जाए। हालांकि अदालत ने मौखिक टिप्पणी की है।
अब लोक अदालत में 19 जनवरी को अगली सुनवाई होगी।
बदहाल सीवरेज व्यवस्था को लेकर लोक अदालत में जनहित याचिका दायर करने वाले वकील व सोनीपत सुधार समिति के सदस्य वकील सुशील कुमार जैन ने बताया कि पिछले माह उनकी तरफ से याचिका लगाई गई थी कि शहर के नागरिक स्थानीय प्रशासन व सरकार को टैक्स देते हैं। मूलभूत सुविधाएं लेना उनका हक है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह घरों का गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है।
लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। पब्लिक हेल्थ व नगर निगम के अधिकारी हालात को सुधारने में नाकाम रहे हैं। अदालत ने सुनवाई के लिए 5 जनवरी की तिथि तय की थी। मंगलवार को कोर्ट ने अदालत में पहुंचे अधिकारियों से सीवरेज व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट मांगी। अधिकारियों ने तर्क दिए कि डेयरी व पॉलीथिन के चलते सीवरेज लाइन जाम हो रही हैं। अदालत ने व्यवस्था के सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
अधिकारियों ने अपने दिए, लेकिन अदालत संतुष्ट नहीं हुई। पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों को अदालत ने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उनका वेतन रोक जैसा कदम अदालत उठा सकती है। जल्द से जल्द एक्शन रिपोर्ट अदालत में दें।
मैं चंडीगढ़ गया हुआ था, नहीं पता
पब्लिक हेल्थ के एक्सईएन एसके दहिया का कहना है कि वे चंडीगढ़ हुए थे। अदालत ने क्या टिप्पणी की है, अभी पता नहीं। अपनी तरफ से पूरा प्रयास की है कि सीवरेज व्यवस्था सुधर जाए, लेकिन नगर निगम के नालों से निकल कर पॉलीथिन सीवरेज लाइन में चले जाते हैं। इससे पूरी लाइन जाम हो जाती है। साथ ही जहां डेयरियां हैं, वहां गोबर से लाइन जाम रहती है।
आखिर कब मिलेगी इस नरक से मुक्ति
आदर्श नगर निवासी प्रवीण देशवाल, प्रवीण छिक्कारा व सोनू खत्री का कहना है कि नेता व अधिकारी बार-बार वादे करते हैं कि जल्द व्यवस्था में सुधार हो जाएगा। सर्दी के मौसम में भी सीवरेज लाइन का यह हाल है, गर्मी के मौसम में क्या होगा, जब लोग पानी ज्यादा प्रयोग करते हैं। पता नहीं शासन व प्रशासन कब इस नरक से मुक्ति दिलाएगा।