गन्नौर। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम लघु सचिवालय में पहुंची और आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की प्रक्रिया की जांच की। निरीक्षण के दौरान ड्राइविंग टेस्ट के नाम पर खानापूर्ति किए जाने का पता लगा। टेस्ट के लिए सांकेतिक चिह्न भी नहीं बनाए गए थे। पार्किंग की जगह पर ही आवेदकों के टेस्ट लिए जा रहे थे। जहां आवेदकों के बैठने तक की सुविधा नहीं थी।
ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की प्रक्रिया के बारे में शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री इंस्पेक्टर श्रवण कुमार के नेतृत्व में राजेश, सतनारायण, सितेंद्र ने लघु सचिवालय में होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि जहां ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट लिया जाता है वह वाहन पार्किंग की जगह है। आवेदकों के लिए बैठने व पानी की व्यवस्था भी नहीं है। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के लिए आठ की आकृति व चार पहिया वाहनों के लिए एच ट्रैक भी नहीं बना था। वहीं ढलान टेस्ट के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं पाई गई। टेस्ट लेने वाले एसडीएम कार्यालय के अधीक्षक खानापूर्ति कर रहे थे। वाहन चालक अपनी मर्जी से आठ व एच की आकृति से चला रहे थे जिन्हें टेस्ट में पास कर दिया गया।
28 आवेदकों के लिए टेस्ट, 3 हुए फेल : एसडीएम कार्यालय के अधीक्षक ने 28 आवेदकों के ड्राइविंग टेस्ट लिये। इस दौरान वाहन चालकों के हेलमेट, सीट बेल्ट व इंडिकेटर से संबंधित बातों का ही ध्यान रखा जा रहा था। अधीक्षक ने किसी भी वाहन चालक से यातायात के नियमों के बारे में नहीं पूछा गया। जबकि लाइसेंस लेने से पहले सडक़ सुरक्षा संकेत व नियमों का ज्ञान जरूरी है। बिना जागरूकता के दुर्घटना होती है। हालांकि ड्राइविंग टेस्ट में 28 में 3 आवेदकों को फेल कर दिया गया। इसके साथ ही तीन आवेदकों को बाइक टेस्ट व तीन को कार टेस्ट में फेल किया गया।
निरीक्षक श्रवण कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान काफी खामियां पाई गई हैं। जिन्हें रिपोर्ट में दर्ज कर दिया गया है। शिकायत मिलने की वजह से निरीक्षण किया गया था। अब रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।