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Sonipat News: नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, आज खरना के साथ करेंगे 36 घंटे का उपवास

Sun, 26 Oct 2025 01:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 31- सोनीपत के मीमारपुर घाट ​स्थित यमुना पर छठ महापर्व को लेकर स्नान व पूजन के लिए पहुंचे श - फोटो : अमर उजाला
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सोनीपत। नहाय-खाय के साथ शनिवार को छठ महापर्व की शुरुआत की गई। रविवार को खरना पूजा के साथ व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं का 36 घंटे का उपवास शुरू होगा। सूर्य उपासना, आस्था एवं पवित्रता का पर्व 28 अक्तूबर को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। सुबह श्रद्धालुओं ने यमुना के मीमारपुर घाट पर पहुंचकर स्नान व पूजा-अर्चना के साथ पर्व की शुरुआत की।
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छठ महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जिले में यमुना के गढ़ मिरकपुर घाट, बेगा घाट, मिमारपुर घाट, कुंडली में तीन जगह, एटलस मंदिर, दुर्गा कॉलोनी, बीसवां मील, गांव ककरोई के पास नहर, बड़वासनी नहर पुल के पास, कबीरपुर, बाबा कॉलोनी व कालूपुर चुंगी पर घाटों की सफाई कर सजाने की तैयारी शुरू हो गई है।
शनिवार को श्रद्धालुओं ने स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत की। भोजन के रूप में विशेष रूप से घिया-दाल, चावल, चने की दाल बनाई गई। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव व छठी मैया की उपासना का पर्व है। इस दौरान 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।
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श्रद्धालु अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देते हैं। माना जाता है कि सूर्य देव के आशीर्वाद से व्यक्ति को निरोगी जीवन प्राप्त होता है। धन-धान्य में बरकत होती है। मान्यता है कि छठी मैया की कृपा से नि:संतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। संतान के सुखी जीवन के लिए भी यह व्रत रखा जाता है।
नहाय-खाय से व्रत की शुरुआत के बाद रविवार को दूसरे दिन खरना की पूजा होगी। इसके बाद व्रतियों का निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरे दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। माना जाता है कि डूबते सूर्य की लाल किरणें अर्घ्य के जल से छनकर तन-मन व बुद्धि को तेज कर देती हैं। फिर अगले दिन छठ के दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण किया जाएगा।
छठी मैया की पूजा का महत्व
पंडित रामकृष्ण पाठक ने बताया कि छठ देवी भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री व सूर्यदेव की बहन हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि रचने के लिए स्वयं को दो भागों में बांट दिया। इसमें दाहिने भाग में पुरुष व बाएं भाग में प्रकृति का रूप सामने आया। सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया। इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। शिशु के जन्म के छठे दिन भी इन्हीं की पूजा की जाती है। इनकी उपासना करने से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता व दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्र में भी षष्ठी तिथि को इनकी पूजा का विधान है।

फोटो 31- सोनीपत के मीमारपुर घाट स्थित यमुना पर छठ महापर्व को लेकर स्नान व पूजन के लिए पहुंचे श- फोटो : अमर उजाला

फोटो 31- सोनीपत के मीमारपुर घाट स्थित यमुना पर छठ महापर्व को लेकर स्नान व पूजन के लिए पहुंचे श- फोटो : अमर उजाला

फोटो 31- सोनीपत के मीमारपुर घाट स्थित यमुना पर छठ महापर्व को लेकर स्नान व पूजन के लिए पहुंचे श- फोटो : अमर उजाला

फोटो 31- सोनीपत के मीमारपुर घाट स्थित यमुना पर छठ महापर्व को लेकर स्नान व पूजन के लिए पहुंचे श- फोटो : अमर उजाला

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