सोनीपत। मुंबई में एक बिल्डिंग प्रोजेक्ट के पुनर्विकास में निवेश के नाम पर सोनीपत के बड़े कारोबारी से मुंबई की 12 फर्मों ने 127 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। आरोप है कि फर्मों की तरफ से फर्जी कागजात तैयार कर कारोबारी को विश्वास में लिया गया और मुनाफे का सौदा बताकर प्रोजेक्ट में निवेश करवाया गया। उन्होंने फर्म के पुनर्विकास के नाम पर प्रोजेक्ट में 30 करोड़ रुपये लगवाए थे। परियोजना पूरी न होने की सूरत में मूल राशि के अलावा 97 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में वापस की जानी थी। शर्त के मुताबिक अब मुंबई की कंपनियों को सोनीपत की कंपनी को 127 करोड़ रुपये देने थे। बाद में कई बार नोटिस भेजे जाने पर भी जब रकम वापस नहीं की तो कारोबारी ने सोनीपत पुलिस आयुक्त को शिकायत दी। उन्हें चेक भी दिए गए थे जो बाउंस हो गए। पुलिस आयुक्त के आदेश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मॉडल टाउन निवासी कारोबारी पावेल गर्ग ने पुलिस आयुक्त बी सतीश बालन को दी शिकायत में बताया कि उनका सोनीपत समेत देश में कई स्थानों पर फर्म में निवेश है। वह रियल एस्टेट फर्म इंपीरियस रियलिटी, एलएलपी में भी हिस्सेदार हैं। उन्होंने बताया कि वर्ली, मुंबई में एक बिल्डिंग प्रोजेक्ट में निवेश के लिए कुछ फर्मों ने उन्हें विश्वास में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज व अन्य कागजात दिखाए थे। जून 2019 में उन्होंने अपनी कंपनी मेसर्स कॉम्बिटिक ग्लोबल कैपलेट से 20 करोड़ रुपये मैसर्स यश एंटरप्राइजेज के बैंक में ट्रांसफर किए थे। यह रकम पांच करोड़, 50 लाख, साढ़े चार करोड़, 2.75 करोड़, 7.75 करोड़ के रूप में अलग-अलग दिनों में ट्रांसफर किए गए। वर्ष 2019 के नवंबर में आरोपी फर्मों ने विश्वास बनाने के लिए उनकी रकम ब्याज के साथ चुका दी। उसके बाद आरोपियों ने उन्हें अगले प्रोजेक्ट में रकम निवेश करने का ऑफर दिया। विश्वास बनाकर लिखित समझौता किया और कहा कि प्रोजेक्ट में तेजी से विकास होगा। अच्छा खासा मुनाफा भी रहेगा। कारोबारी पावेल गर्ग ने पुलिस को बताया कि मेसर्स इंपीरियस रियलिटी एलएलपी कंपनी और मुंबई की यश इंटरप्राइजेज के बीच तय हुआ था कि मुंबई के वर्ली स्थित एक फर्म के पुनर्विकास के लिए मेसर्स इंपीरियस रियलिटी एलएलपी कंपनी 30 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। जिसके बाद उसका परियोजना में 50 फीसदी का हिस्सेदार माना जाएगा। वहीं, इस परियोजना को 30 जून, 2021 तक पूरा कर सौंपा जाएगा। यदि कंपनी तय समय पर परियोजना पूरी नहीं कर पाई तो नुकसान के तौर पर 30 करोड़ के अलावा 97 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने होंगे। परियोजना में विफल होने के बाद तय शर्त के मुताबिक यश इंटरप्राइजेज को अब सोनीपत की मेसर्स इंपीरियस रियलिटी एलएलपी कंपनी को 127 करोड़ रुपये देने हैं। मुंबई की कंपनी इसके लिए तैयार भी हो गई। इसके लिए उनकी ओर से 12.7-12.7 करोड़ रुपये के 10 चेक दिए गए। हालांकि चेक बाउंस हो गए। जिसके चलते शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायत दी है। आरोप है कि आरोपियों ने मुंबई में एक इमारत परियोजना में निवेश के लिए कुछ फर्मों ने उन्हें विश्वास में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज और अवॉर्ड भी दिखाए थे।
इन कंपनियों के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा
शिकायतकर्ता ने मुंबई की मैसर्स यश एंटरप्राइजेज, रोनी पारस पोरवाल, मैसर्स मेहता लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मांगीलाल मिश्रीमल मेहता, निदेशक मैसर्स मेहता लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, जयंती मांगीलाल मेहता, निदेशक मैसर्स मेहता लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, अशोक मांगीलाल मेहता, निदेशक मैसर्स मेहता लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स समय एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, पृथ्वीराज सेठ वेलचंदजी, निदेशक मैसर्स समय एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, समय विनोद सेठ, निदेशक मैसर्स समय एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, प्रकाश बोहरा, मंजू पारस पोरवाल व रिंकी पारस पोरवाल के खिलाफ थाना सिविल लाइन में भादंसं की धारा 403, 406, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया है।
सोनीपत के कारोबारी पावेल गर्ग ने मुंबई की कई कंपनियों पर धोखाधड़ी व जालसाजी से 127 करोड़ रुपये ऐंठने का आरोप लगाया है। उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। -रविंद्र कुमार, थाना प्रभारी, थाना सिविल लाइन, सोनीपत।