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मंत्री के सामने अफसरों पर शिकायतों के फर्जी निपटारे व भ्रष्टाचार के लगे आरोप, मंत्री ने फटकार लगाते हुए कहा अब ऐसे अफसरों पर कार

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जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में अफसरों को निर्देश देते मंत्री मुलचंद शर्मा - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में सोमवार को पहली बार आए मंत्री मूलचंद शर्मा के सामने ही कई विभागों के अधिकारियों की फर्जी तरीके से शिकायत निपटाने की पोल खुल गई तो किसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। वहां पिछले ढाई साल तक से शिकायत का निपटारा नहीं होने के कारण जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्यों तक ने अफसरों को घेरते हुए उनपर खूब आरोप लगाए। इस तरह शिकायतों का निस्तारण नहीं होने पर मंत्री सख्त हो गए और अफसरों को फटकार लगाते हुए अब ऐसे अफसरों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी। इसके साथ ही पिछले काफी समय से लंबित शिकायतों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह से पंद्रह दिन तक का समय निर्धारित किया। वहीं बैठक में 18 शिकायतें रखी गई, जिनमें से केवल 3 का निस्तारण हो सका। इनके अलावा बैठक के बाद में मंत्री के सामने 50 से ज्यादा शिकायत आईं और उनके भी निस्तारण के आदेश दिए गए।
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जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक सोमवार को लघु सचिवालय सभागार में हुई। जहां परिवहन एवं खनन मंत्री मूलचंद शर्मा के अलावा डीसी डॉ. अंशज सिंह, एएसपी उदय सिंह मीना, विधायक मोहनलाल बड़ौली, निर्मल सिंह ने पहुंचकर बैठक शुरू कराई। इस बैठक में 18 शिकायतों को रखा गया, जिनमें पांच शिकायतें पुरानी रखी गईं तो उसमें 13 नई शिकायत शामिल की गई थीं। इन सभी शिकायतों पर कार्रवाई देखी गई तो उनमें से अधिकतर को निपटाने का अधिकारियों ने दावा किया। लेकिन उसी समय लोगों ने अधिकारियों की पोल खोल दी और कहा कि अधिकारी केवल कागजों में शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं। वह जमीनी स्तर पर कुछ नहीं कर रहे हैं, जिससे शिकायत लटकी हुई हैं। बड़ौली के श्रीनिवास की डेढ़ साल पुरानी शिकायत को एसडीएम विजय सिंह ने निपटाने का दावा किया तो शिकायत कर्ता ने तुरंत ही मंत्री से कहा कि वह इस समय भी मौके का निरीक्षण करा सकते हैं। इस समय भी तालाब पर कब्जे का प्रयास हो रहा है और वहां से मिट्टी नहीं उठवाई गई है। इसके अलावा गांव में किसी तरह की विकास कार्यों की जांच नहीं हुई है, जिसमें मंत्री ने दोबारा जांच के आदेश कर दिए। करेवड़ी के अशोक कुमार की ढाई साल से लंबित पानी निकासी की शिकायत का जल्द ही समाधान करने का आश्वासन सिंचाई विभाग व पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने दिया तो जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्य भड़क गए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि जब ढाई साल में शिकायत का निस्तारण नहीं हुआ तो अब जल्द कब तक कराया जाएगा। जिसपर मंत्री ने अफसरों को फटकार लगाते हुए 15 दिन में समस्या के समाधान का समय तय कर दिया। इस तरह ही सिटावली की कृष्णा की पानी निकासी की जगह पर अवैध कब्जे की शिकायत को तहसीलदार सोनीपत व बीडीपीओ गन्नौर ने गलत बता दिया, जिनकी पोल महिला ने मंत्री के सामने खोल दी। महिला ने पूरी स्थिति के बारे में मंत्री को बताया तो मंत्री ने नाराजगी जताते हुए जल्द ही अवैध कब्जे हटवाने के आदेश दिए। इस तरह ही ईदगाह कॉलोनी के उस्मान की आंवली की ड्रेन में अवैध खनन की शिकायत का निस्तारण करने की बात खनन विभाग के अधिकारियों ने कही तो उस्मान ने मंत्री से कहा कि अधिकारी पूरी तरह से झूठ बोल रहे हैं। वहां खुलेआम खनन हो रहा है और किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप लगाया गया कि खनन विभाग के अधिकारी ही मिलकर अवैध खनन करा रहे हैं, जिसपर मंत्री ने खनन करने वालों का पता लगाकर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इसके साथ ही खनन विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इस तरह अधिकतर शिकायतों का निपटारा करने का दावा अधिकारियों ने किया और लोगों ने तुरंत ही उनकी पोल खोल दी। जिसपर मंत्री मूलचंद शर्मा भी सख्त हो गए और ऐसे अधिकारियों को अब सीधे कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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गरम धरम ढाबे व सुखदेव ढाबे के खिलाफ हंगामा
हसनपुर के रविंद्र व अन्य लोगों ने मंत्री से बताया कि अमरीक सुखदेव ढाबा व गरम धरम ढाबे का दूषित पानी जमीन में उतारा जा रहा है। जिससे वहां का पानी दूषित हो गया है और उससे लोग बीमार हो रहे हैं। इसपर अफसरों ने बताया कि उनके सैंपल कराए गए थे, जिनमें गरम धरम के पानी का सैंपल फेल आया था। इसके साथ ही वहां एसटीपी लगाने की प्रक्रिया चल रही है। निगम कमिश्नर अशोक बंसल ने बताया कि ठेकेदार नहीं मिल रहे थे और अब ठेकेदार मिल गया है, जिससे जल्द ही एसटीपी बनवा दिया जाएगा।
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प्लॉटों पर नहीं मिला कब्जा, 2-2 हजार रुपये मांगे जा रहे, मंत्री ने लगाई फटकार
रामनगर के रामकिशन ने मंत्री को बताया कि 1994 में एससी-बीसी को 100 वर्ग गज के प्लाट मिले थे और उस समय सरपंच ने उनकी रजिस्ट्री कराई थी। जिसके बाद सरपंच का देहांत हो गया था और उनको प्लॉटों पर कब्जा नहीं मिल सका। आरोप है कि वह कब्जे के लिए चक्कर काट रहे हैं और उनसे तहसील कर्मी 2-2 हजार रुपये की रिश्वत मांगते हैं। जिसपर अफसरों ने जल्द ही कब्जा दिलाने की बात कही तो मंत्री ने अफसरों को फटकार लगाते हुए कहा कि अभी तक कब्जा क्यों नहीं दिलाया गया। मंत्री ने तहसीलदार सोनीपत व डीडीपीओ को सात दिन में समस्या के निस्तारण का आदेश दिया।
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बेटे की मौत के बाद भटक रहे परिजन, मंत्री ने लगाई अफसरों की क्लास
खांडा गांव के राजेश ने बताया कि मार्च 2018 में उसके बेटे गौरव की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसने सरकार की डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी दुर्घटना बीमा योजना के तहत एसडीएम खरखौदा को मई 2018 में आवेदन किया था। लेकिन उनको चक्कर कटवाए जा रहे हैं और समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। जिसपर मंत्री ने अफसरों की क्लास लगाई तो डीसी डॉ. अंशज सिंह ने कहा कि वह खुद उनकी समस्या का समाधान कराएंगे।
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बीसवां मिल से बहादुरगढ़ रोड की खराब हालत का मामला भी उठा, जल्द शुरू होगा काम
मनोज कुमार ने बीसवां मिल से बहादुरगढ़ रोड की खराब हालत का मामला उठाया और पिछले तीन साल से समस्या का समाधान नहीं होने की बात कही। जिससे वहां रोजाना दुर्घटना होती है। जिसपर कहा गया कि जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा और अब उसका स्थायी समाधान किया जाएगा। लोगों ने आरोप लगाया कि इस तरह का आश्वासन पिछले काफी समय से मिल रहा है, जिसपर मंत्री ने कहा कि अगर अब काम शुरू नहीं होता है तो वह दोबारा उनको आकर अवगत कराएं।
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पुलिस कर्मी का मीटर गायब किया, मुकदमा दर्ज करने के आदेश
पुलिस विभाग में शिकायत ब्रांच के इंचार्ज सतीश कुमार की पत्नी मंजूरानी की ओर से शिकायत की गई थी कि उनका मीटर बदला गया था, लेकिन उसके बाद से उनका बिल नहीं बनाया जा रहा है। जबकि वह चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं। इस समस्या का दो दिन पहले ही मीटिंग को देखते हुए निस्तारण किया गया। इसके साथ ही बिजली निगम के एक्सईएन जेसी शर्मा ने बताया कि प्राइवेट कंपनी के कर्मियों ने उनका पुराना मीटर गुम कर दिया है, जिसकी वजह से समस्या हो रही थी। इसपर उस कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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बिजली निगम पर रिश्वत मांगने व पुराना सामान लगाने का आरोप
कतलूपुर के अमित ने मंत्री के सामने बताया कि उनके घर के गेट के सामने एक ट्रांसफार्मर लगा था, जिसे शिफ्ट कराने के लिए बिजली निगम में संपर्क किया तो उनको एस्टीमेट 26 हजार 134 रुपये बनाकर दिया गया। आरोप है कि उससे दस हजार रुपये की रिश्वत भी मांगी गई, लेकिन जब उसने रिश्वत नहीं दी तो उसकी फाइल कैंसिल कर दी और दोबारा से एस्टीमेट 66 हजार रुपये का बना दिया। जिसके बाद रुपये जमा कराए तो पुराना सामान लगा दिया गया। इसको मंत्री मूलचंद शर्मा ने गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के चीफ इंजीनियर व कष्ट निवारण समिति के सदस्य से जांच कराने के आदेश दिए।
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