सोनीपत। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला अभिभावकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। दाखिले के लिए अभिभावकों को कभी स्कूलों तो कभी शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समाधान नहीं मिल पा रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि कई बच्चों को उनके घर से 10 से 12 किलोमीटर दूर स्कूल अलॉट किए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार 1 से 3 किलोमीटर के दायरे में ही स्कूल आवंटित होना चाहिए। इसके अलावा कुछ निजी स्कूल प्रबंधन भी बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं।
सोमवार को बड़ी संख्या में अभिभावक मॉडल टाउन स्थित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल के माध्यम से ऐसे स्कूल आवंटित किए गए, जिनका उन्होंने आवेदन के समय चयन ही नहीं किया था। वहीं, कई स्कूल प्रबंधन यह कहकर दाखिला देने से इंकार कर रहे हैं कि उन्हें विभाग की ओर से कोई आधिकारिक सूचना (मेल) प्राप्त नहीं हुई है।
अभिभावक अजय, अतुल, नरेंद्र व जावेद का यह भी कहना है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर खंड शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचे तो उनके शिकायत पत्र तक स्वीकार नहीं किए गए और न ही कोई स्पष्ट समाधान दिया गया।
इससे नाराज अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ रोष जताया। बढ़ती भीड़ को देखते हुए कर्मचारियों ने आश्वासन देकर अभिभावकों को शांत कराया।
ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद भी निराशा
जिले में आरटीई के तहत 3966 सीटों के लिए 2224 अभिभावकों ने आवेदन किया था, जिनमें से 2214 अभिभावकों ने दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली। इसके बावजूद बच्चों को स्कूल अलॉट होने के बाद भी दाखिला नहीं मिल पा रहा है।
आरटीई अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नर्सरी, केजी और पहली कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होती हैं। इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया 16 अप्रैल तक उज्ज्वल पोर्टल के माध्यम से पूरी की गई थी।
-आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों से कुछ त्रुटियां होने की संभावना है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है और मामले से मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा। आरटीई के तहत 1 से 3 किलोमीटर के दायरे में स्कूल अलॉट करने का प्रावधान है। यदि कोई अभिभावक दूर स्थित स्कूल में दाखिला करवाता है, तो फीस से संबंधित स्थिति अलग हो सकती है। विभाग अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है।
रचना बाना, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी