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Sonipat News: भट्ठे बंद, पुराना स्टॉक खत्म होने से बढ़े ईंटों के दाम

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फोटो 71: ईंटों के बढ़े भाव के बीच निर्माण कार्य में जुटे मजदूर। (संवाद) - फोटो : File Photo
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बादली। भट्ठे बंद होने और उपलब्ध स्टॉक लगातार कम होने से ईंटों के दाम में तेजी आई है। जुलाई में 7800 से 8200 रुपये प्रति हजार बिकने वाली अच्छी गुणवत्ता की ईंट अब 9000 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ ही दिनों में ईंटों के दाम में 500 से 900 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
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भट्ठा संचालकों के अनुसार 30 जून को भट्ठे बंद हो गए थे। अब आगामी एक मार्च को भट्ठों में दोबारा उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इस दौरान बाजार में नए उत्पादन की आपूर्ति नहीं हो रही है। निर्माण कार्य जारी रहने से ईंटों की मांग बनी हुई है जबकि उपलब्ध स्टॉक लगातार कम हो रहा है। ऐसे में मांग और उपलब्धता के अंतर का असर सीधे ईंटों के भाव पर पड़ रहा है।

अलग-अलग श्रेणी की ईंटों के भाव भी बढ़े

ईंटों के भाव में तेजी केवल अच्छी गुणवत्ता वाली ईंटों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग श्रेणी की ईंटों के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। ईंट कारोबारी मनोज और मनजीत ने बताया कि भट्ठे बंद होने के कारण नया स्टॉक बाजार में नहीं आ रहा है। फिलहाल पुराने स्टॉक से ही मांग पूरी की जा रही है। बारिश के मौसम में स्टॉक सीमित होने से आने वाले दिनों में भी ईंटों के भाव पर दबाव बना रह सकता है।
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रेत, डस्ट और रोड़ी भी महंगी
ईंटों के अलावा भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली रेत, डस्ट और रोड़ी के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे मकान की नींव से लेकर दीवार और छत तक निर्माण की लागत बढ़ रही है। जिन लोगों ने पहले से निर्माण का बजट तैयार किया था उन्हें अब अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

ठेकेदारों और मजदूरों पर भी असर

निर्माण सामग्री महंगी होने का असर ठेकेदारों और मजदूरों के काम पर भी पड़ रहा है। ठेकेदार जवाला और आकाश ने बताया कि बढ़ती लागत के कारण लोग सीमित बजट में ही निर्माण करा रहे हैं। कई लोग निर्माण कार्य की गति धीमी कर रहे हैं। नए निर्माण कार्य कम होने से ठेकेदारों को काम मिलने में परेशानी हो रही है। मजदूरों के रोजगार पर भी असर पड़ रहा है।







ईंटों के अलावा भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली रेत, डस्ट और रोड़ी के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे नींव से लेकर दीवार और छत तक के निर्माण की लागत बढ़ गई है।
— मोनू, बादली

जिन लोगों ने पहले से मकान निर्माण का बजट तैयार कर रखा था। उनके लिए बढ़ती कीमतों के कारण खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। निर्माण सामग्री के लगातार बढ़ते दामों से उनका अनुमानित बजट बिगड़ गया है।
— सुधीर, बुपनियां

पहले जहां एक निश्चित रकम में निर्माण पूरा होने की उम्मीद थी वहीं अब ईंट, रेत, डस्ट और रोड़ी के दाम बढ़ने से अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है। बढ़ती लागत के कारण कई लोगों ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है।
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— कुलदीप, गुभाना
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