फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों में निमोनिया रोकेगा सांस अभियान, आज होगी शुरुआत, 28 फरवरी तक चलेगा

विज्ञापन
नागरिक अस्पताल के कॉन्फ्रेंस हॉल में ट्रेनिंग के दौरान उपस्थित एएनएम। संवाद - फोटो : Sonipat
विज्ञापन
0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में होने वाले निमोनिया को रोकने के लिए सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रीलाइज निमोनिया सक्सेजफुली (सांस) अभियान की शुरुआत की जा रही है। शनिवार से इस अभियान की शुरुआत की जा रही है। निमोनिया से शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। निमोनिया नहीं तो बचपन सही का नारा देकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक किया जाएगा। 28 फरवरी तक यह अभियान चलाया जाएगा।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान बच्चों में निमोनिया रोकथाम के लिए सांस अभियान की शुरुआत होगी। इसके माध्यम से लोगों के साथ चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ व स्वास्थ्यकर्मियों को निमोनिया से बचाव के प्रबंधन एवं उपचार को लेकर जागरूक किया जाएगा। इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी हो चुके हैं। बच्चों के बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। निमोनिया से पीड़ित बच्चों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ता घर-घर जाएंगी। इसके बाद संदिग्ध मिलने पर बच्चों को अस्पताल भेजकर उनका उपचार कराने में मदद कर सकेंगी।
जिले में 0 से 5 वर्ष तक के 2 लाख 12 हजार 719 बच्चे हैं। इनमें 16 फीसदी बच्चे प्रति वर्ष निमोनिया से संक्रमित हो जाते हैं। बच्चों में निमोनिया के कारण होने वाली मृत्यु अन्य संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु की तुलना में काफी अधिक है। जिसके सामान्य लक्षण खांसी-सर्दी, बुखार, तेजी से सांस लेना, पसलियों का अंदर धंसना हैं। निमोनिया के कारण मृत्यु दर में कुपोषण, स्वच्छ पेयजल की कमी, स्वच्छता व स्वास्थ्य देखभाल मुख्य कारक हैं। जिससे समय पर लक्षणों की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू किया जाए। अभिभावकों में निमोनिया से बचाव को लेकर जागरूकता आने से बच्चों को इससे बचाया जा सकता है। निमोनिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले छह माह में शिशु को केवल स्तनपान करवाना, छह माह बाद पूरक पोषाहार देना, विटामिन ए की खुराक देना, निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों का टीकाकरण करवाना व साबुन से हाथ धुलवाना जरूरी है।
विज्ञापन

सांस तेजी से लेने पर बच्चों में निमोनिया का मुख्य लक्षण
0-5 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों में निमोनिया एक घातक बीमारी के रूप में उभरा है। निमोनिया से बचाव के लिए उसका उचित प्रबंधन महत्वपूर्ण है। 0-2 माह तक के बच्चे प्रति मिनट 60 बार सांस ले सकते हैं। 2 से 12 माह तक के लिए प्रति मिनट 50 बार और 12 माह से 5 साल तक के बच्चे प्रति मिनट 40 बार सांस ले सकते हैं। अगर इस उम्र में इससे ज्यादा सांस लेने पर निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों को सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है।
बच्चों में निमोनिया की रोकथाम करने के लिए शनिवार को सांस अभियान की शुरुआत की जाएगी। अभियान के तहत संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए एएनएम को प्रशिक्षण देने की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ सभी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें