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बॉर्डर सील : दूध, घी, पनीर की मांग हुई कम

Thu, 22 Feb 2024 02:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 01- गन्नौर स्थित डेयरी प्लांट। संवाद
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गन्नौर। किसानों के दिल्ली कूच को लेकर बॉर्डर सील है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ उद्योगपतियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बॉर्डर सील होने से रोजाना इस्तेमाल में लाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की मांग और आपूर्ति प्रभावित हुई है। दूध, घी और पनीर की मांग में भी गिरावट आई है। इससे डेयरी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि समय पर माल नहीं पहुंचने से खराब होने का डर सताता रहता है। मांग कम होने और माल भाड़ा बढ़ने से रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
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किसानों ने 13 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान किया था। इस पर पुलिस ने हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर और हरियाणा-दिल्ली के कुंडली बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया था। शंभू बॉर्डर सील होने से चंडीगढ़ जाने वाले वाहनों को वाया यमुनानगर तो दिल्ली के लिए वाया नरेला होते हुए भेजा रहा है। इन मार्गों पर लंबा जाम लग रहा है। कारोबारियों का कहना है कि कई बार दूध, घी व पनीर लेकर जाने वाली गाड़ियां जाम में फंस जाती हैं। समय पर माल नहीं पहुंचने से खरीदार वापस भेज देते हैं। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
ढाबों पर 60 फीसदी तक कम हुई मांग
डेयरी कारोबारियों का कहना है कि ढाबों पर दूध, घी, पनीर की काफी ज्यादा मांग थी, लेकिन किसान आंदोलन के कारण मुरथल के ढाबों से ग्राहक भी गायब होते जा रहे हैं। इस कारण उनके उत्पादों की मांग भी कम हो गई है। हालात यह हैं कि खर्च पूरा करने के लिए उन्हें अपना माल सोनीपत, पानीपत व करनाल में अलग-अलग स्थानों पर कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। अगर किसान आंदोलन लंबा चला तो उन्हें अपना कारोबार बंद करने पर विवश होना पड़ेगा।
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कारोबारी बोले
-कुंडली बाॅर्डर सील होने से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। रास्ते भी लंबे हो गए हैं। दूध से निर्मित पदार्थ रोजाना दिल्ली, अहमदाबाद, पंजाब सहित अन्य स्थानोंं पर भेजा जाता है। वैकल्पिक मार्गों पर जाम के कारण माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा और वापस आ रहा है। मुरथल के ढाबों पर भी खपत कम हो गई है। हालात यह है कि पहले जहां एक हजार किलो आपूर्ति करते थे, अब घटकर 300 किलो तक रह गया है।- हरीश करहाना, कारोबारी

सारा माल दिल्ली जाता था। अब बॉर्डर सील होने से दूध, घी, पनीर की मांग कम हो गई है। जबकि ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ गया है। पहले माल भेजने में करीब 5500 रुपये खर्च आता था, वहीं अब बढ़कर नौ हजार रुपये तक हो गया है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जबकि माल की मांग कम होती जा रही है। सरकार को इसके लिए रास्ता निकालना चाहिए, ताकि कारोबारियों के साथ आमजन को राहत मिल सके।- दिनेश जैन, कारोबारी
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