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राकेश टिकैत का नया एलान : सरकार ने कहीं भी फसल बेचने का दिया हक, अब संसद में गेहूं बेचेंगे किसान

Fri, 05 Mar 2021 09:42 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)

सार

  • टिकैत बोले- सरकार ने किसान को कहीं भी फसल बेचने का दिया हक 
  • अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गेहूं लादकर दिल्ली के अंदर जाएंगे किसान
  • संसद सबसे बड़ा इंसाफ का मंदिर, न्याय के लिए संसद जाएंगे : टिकैत  
  • एक्सप्रेस-वे से गाजीपुर बॉर्डर जाते वक्त कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे थे टिकैत
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राकेश टिकैत (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सरकार कह रही है कि किसानों को किसी भी जगह फसल बेचने का हक दिया है और वह पूरे देश में कहीं भी जाकर अपनी फसल बेच सकते हैं। अब किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लादकर संसद में बेचने जाएंगे। यह कहना है भाकियू नेता राकेश टिकैत का। वे शुक्रवार को कुंडली बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचे थे।

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टिकैत ने कहा कि संसद भी एक बड़ी मंडी है, जहां व्यापारी बैठे हैं और वहां अपने फायदे के कानून बनाते हैं। संसद सबसे बड़ा इंसाफ का मंदिर है और हम इंसाफ के लिए संसद पर जाएंगे। अगर पुलिस रोकने का प्रयास करेगी तो उसको बता दिया जाएगा कि आंदोलन करने नहीं, बल्कि संसद पर गेहूं बेचने जा रहे हैं। उसके बाद भी किसान को रोकने का प्रयास हुआ तो हम टेंट लगाकर उसी जगह पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर बैठे किसानों ने गर्मी का पूरा इंतजाम कर लिया है और जिस तरह से हमारे पूर्वज झोपड़ी बनाकर रहते थे, उसी तरह अब किसान झोपड़ी बनाकर रहेंगे। 

किसान आंदोलन को 100 दिन पूरे होने के साथ ही 22 जनवरी के बाद सरकार के साथ बातचीत नहीं होने पर टिकैत ने कहा कि एक कहावत बताई गई कि बिछड़ा हुआ मेले में मिलता है। इस सरकार ने सर्दी में बातचीत खत्म की थी तो अब आगे सर्दी में ही बातचीत शुरू होगी। इसलिए यह आंदोलन सर्दी तक चलेगा और किसान अब यहां से जाने वाला नहीं है, क्योंकि किसान के लिए यह जगह भी गांव की तरह है।

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यहां से दिल्ली की एक-एक कील निकालकर ही किसान वापस जाएंगे। केएमपी जाम को सफल बनाना है तो उसमें किसी तरह का बवाल नहीं हो, उसका भी ध्यान हमें खुद रखना है। क्योंकि सरकार पहले भी आंदोलन को बदनाम कर चुकी है और वह लगातार षड्यंत्र रच रही है। 

पश्चिम बंगाल में 12-14 मार्च तक रहेंगे, सरकार व सहयोगी दलों का विरोध करेंगे
भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान नेता 12-14 मार्च तक बंगाल में रहेंगे और वहां किसानों के साथ आमजन को बताया जाएगा कि किस तरह से सरकार उनका हक छीन रही है। बताया जाएगा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल रही है तो गैस, पेट्रोल, डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वहां सरकार व सहयोगी दलों का विरोध किया जाएगा। 

राकेश टिकैत ने कहा कि यह वैचारिक क्रांति का आंदोलन बन चुका है और यह अब खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जाकर पंचायत करेंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। सरकार का इलाज किए बिना किसान यहां से नहीं जाएगा। हम किसी पार्टी को पंचायतों के लिए मना नहीं कर रहे, क्योंकि किसान का चिह्न लगा कर यह रैलियां कर रहे हैं।
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