संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। मानव मिलन के संस्थापक एवं नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि भक्तामर अनुष्ठान हमें सिखाता है कि भक्ति केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। भक्ति में सच्चा आनंद व शांति निहित है। एकजुट होकर किसी उद्देश्य के लिए किए गए कार्य से शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. मणिभद्र महाराज सेक्टर-15 स्थित जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। प्रवचन के उपरांत मणिभद्र मुनि महाराज, पुनीत मुनि महाराज व महासाध्वी सृजना महाराज ने श्री एसएस जैन सभा, जैन स्थानक मंडी में चातुर्मास के लिए स्थान परिवर्तन किया। सेक्टर-15 जैन स्थानक से श्रद्धालुओं ने भक्तामर अनुष्ठान के कलश को सिर पर धारण कर संतों के साथ भक्ति के गीत गाते हुए पदयात्रा निकाली। यात्रा का नेतृत्व एसएस जैन सभा, सेक्टर-15 के प्रधान महावीर प्रसाद जैन व अंतरराष्ट्रीय मानव मिलन की अध्यक्ष कुसुम जैन ने किया। संतों के सानिध्य में भक्तामर का अनुष्ठान 25 सितंबर से 16 अक्तूबर तक मंडी स्थित जैन स्थानक में किया जाएगा। यात्रा में सभा के महामंत्री मामन चंद जैन, मंडी संघ के महामंत्री त्रिलोक जैन, विनोद जैन, बसंत जैन, जयकुमार जैन मौजूद रहे।
मन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करती है श्रीमद्भागवत
राई। गांव मलिकपुर में ग्रामीणों की ओर से स्वास्थ्य केंद्र के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक उमेश कृष्ण शास्त्री ने वामन अवतार व शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। इससे पहले कथावाचक ने श्रद्धालुओं के साथ भागवत पूजन कर कथा का शुभारंभ किया। कथावाचक उमेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जो मनुष्य श्रीमद्भागवत कथा को आत्मसात कर लेता है, वह सांसारिक दुखों से मुक्त हो जाता है। श्रीमद्भागवत कथा बड़े पापियों को भी पाप मुक्त करने में सहायक है। यह मन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करती है। जीवन में यदि मान, बड़ा पद या प्रतिष्ठा मिल जाए तो उसे ईश्वर की कृपा मानकर भलाई के कार्य करने चाहिए। कथा के दौरान उमेश कृष्ण शास्त्री के भजनों पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया। कार्यक्रम में बलबीर सैनी, राजीव त्यागी, राकेश, सतप्रकाश, सतबीर, सुखबीर मौजूद रहे।