बैंयापुर लहराड़ा का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
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सोनीपत। बैंयापुर लहराड़ा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर 100-100 रुपये की वसूली करने के मामले में जांच शुरू हो गई है। बीईओ संध्या मलिक जांच करने के लिए स्कूल में पहुंचीं, जहां यह पुष्टि हो गई कि विद्यार्थियों से सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर वसूली की गई थी। मामला उजागर होने पर उस रुपये को स्कूल के खाते में जमा करा दिया गया था, लेकिन उसे विद्यार्थियों को वापस नहीं दिया गया। अब पूरे मामले का खुलासा होने पर विद्यार्थियों को रुपये वापस लौटाने शुरू कर दिए गए हैं और अधिकतर विद्यार्थियों को रुपये वापस दिए गए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर विद्यार्थियों से किस नियम के तहत रुपये लिए गए, जिसका एसएमसी व स्कूल शिक्षक जवाब नहीं दे सके हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बैंयापुर, लहराड़ा, कालूपुर, मोहननगर समेत शहर तक के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। इस तरह स्कूल में लगभग 750 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन विद्यार्थियों से शिक्षकों ने स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर अपने घर से 100-100 रुपये लेकर आने का आदेश जारी किया था। विद्यार्थियों से कहा गया कि सीसीटीवी कैमरे लगवाने जरूरी हैं और सरकार उसके लिए रुपये नहीं दे रही है तो इसलिए विद्यार्थियों से रुपये लेकर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। किसी विद्यार्थी के परिजन ने रुपये दे दिए तो किसी ने इसका विरोध किया था। उनके परिजन विरोध करने के लिए स्कूल तक पहुंच गए थे तो उनको विद्यार्थी का स्कूल से नाम काटने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा जिन शिक्षकों ने विद्यार्थियों से वसूली करने से इंकार कर दिया था, उनको भी धमकी दी गई थी कि वह वसूली नहीं करेंगे तो उनके छुट्टी लेने पर सीएल की जगह एमएल काट दी जाएगी। डीईओ कुलदीप दहिया के पास मामला पहुंचने पर विद्यार्थियों के रुपये वापस लौटाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन वह रुपये लौटाने की जगह स्कूल के खाते में जमा करा दिए गए। इस तरह अभी तक विद्यार्थियों को रुपये वापस नहीं लौटाए गए थे और वह रुपये भी डीईओ के संज्ञान में मामला आने के बाद ही खाते में जमा कराए गए थे। इस पूरे मामले का अमर उजाला ने खुलासा किया तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। इस मामले में बीईओ संध्या मलिक जांच करने के लिए स्कूल में पहुंची तो वहां यह साफ हो गया कि विद्यार्थियों से सीसीटीवी लगवाने के नाम पर 100-100 रुपये वसूल किए गए थे। वहीं एमएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) ने यह लिखकर दिया कि स्कूल के पास फंड नहीं था और इस कारण ही उनकी सहमति से विद्यार्थियों से 100-100 रुपये लिए थे। जिसमें सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि आखिर किस नियम से विद्यार्थियों से वसूली की गई है और इसको ही बीईओ ने अपनी जांच में पूरी तरह से गलत माना है। जिसके बाद विद्यार्थियों के रुपये वापस लौटाने शुरू कर दिए हैं।
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जिले के कई स्कूलों में फंड नहीं, क्या सभी विद्यार्थियों से वसूली करेंगे
बैंयापुर लहराड़ा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों व एसएमसी ने जांच में बड़ा ही अजीब तर्क दिया है कि स्कूल फंड में कम रुपये होने के कारण विद्यार्थियों से 100-100 रुपये मंगवाए गए। लेकिन किस नियम के तहत रुपये मंगवाए गए हैं, उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है। इसके साथ ही यह सवाल खड़ा हो जाता है कि इस तरह जिले के अन्य कई स्कूलों में फंड नहीं है तो क्या वह भी विद्यार्थियों से वसूली शुरू कर देंगे। इसको देखते हुए पूरी जांच रिपोर्ट स्कूल शिक्षकों के खिलाफ दिख रही है।
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लहराड़ा बैंयापुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर विद्यार्थियों से रुपये लेने के मामले की जांच करने के लिए मैं गई थी। जांच में पता चला कि विद्यार्थियों से रुपये लिए गए थे जो स्कूल के खाते में जमा कराए गए थे। लेकिन रुपये लेना पूरी तरह से गलत है और विद्यार्थियों के रुपये वापस करा दिए गए हैं। इसकी पूरी जांच रिपोर्ट जल्द उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
-संध्या मलिक, बीईओ