रोहतक। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर शुक्रवार को हुई अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का असर दिखाई दिया। विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने एसबीआई मेन ब्रांच के बाहर धरना दिया।
यूनियन नेताओं ने कहा कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक यूनियनों के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग को लेकर समझौता हो चुका है लेकिन ढाई साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। शनिवार को अवकाश देने के बदले रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमति दी थी जिससे बैंकिंग के कुल कार्य घंटे कम न हों।
एआईबीओसी के राज्य सचिव जितेंद्र सिवाच ने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में वर्ष 1985 से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। राज्य सरकार, जिला कार्यालय, अदालतें, आयकर विभाग, शेयर बाजार, रिजर्व बैंक और एलआईसी में भी पांच दिवसीय व्यवस्था है। इसके विपरीत बैंक कर्मचारियों को अभी छह दिन काम करना पड़ता है।
एक दिन का वेतन कटने के बावजूद हड़ताल जारी रही
यूनियन नेताओं ने कहा कि हड़ताल के दिन कर्मचारियों का वेतन काटा जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिन का वेतन कटवाकर हड़ताल में हिस्सा लिया।
धरने में हरियाणा राज्य एआईबीओसी के राज्य सचिव जितेंद्र सिवाच, राजेश बामल, मनोज (डीजीएस एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन), अमित भाटिया (पीएनबी), होशियार सिंह (सीबीआई), अशोक दलाल (यूनियन बैंक), दीपक हुड्डा और विजय मुंजाल (आईओबी) सहित अन्य कर्मचारी व अधिकारी मौजूद रहे।
आगे तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी
नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय अखिल भारतीय बैंक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 26 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया गया है।