सोनीपत। पहलवान बजरंग पूनिया ने ओलंपिक में पदक जीतने के लिए जमकर पसीना बहाया और अपनी हर कमी को दूर किया था। उसने सबसे ज्यादा ध्यान ग्राउंड रेसलिंग पर रखा और उसके लिए स्टेमिना भी बढ़ाया। वहीं अपने फेवरेट गट्टे के दांव व तेघा दांव पर भी जमकर मेहनत की थी। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के लिए भी उन्होंने गट्टे के दांव का सहारा लिया।
ओलंपिक के लिए बजरंग पूनिया जब अभ्यास करता था तो वह उन कमियों को दूर करने पर ज्यादा ध्यान देता था जो पहले हुई प्रतियोगिताओं में उसको परेशानी में डालती थी। बजरंग ने सबसे ज्यादा ध्यान ग्राउंड रेसलिंग व अपना स्टेमिना बढ़ाने पर दिया है। ग्राउंड रेसलिंग में पहलवान डिफेंसिव नहीं खेलता है और वह खड़े रहकर अपने हाथों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करता है। इसके लिए पहलवान में स्टेमिना होना जरूरी है और स्टेमिना की कमी हो जाती है तो उसे हार झेलनी पड़ सकती है। बजरंग ने अभ्यास के दौरान इन दोनों कमियों को पूरी तरह से दूर कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक राज सिंह छिक्कारा ने बताया कि कांस्य पदक के लिए मुकाबले में बजरंग ने गट्टे के दांव का प्रयोग कर अंक बटोरे। साथ ही बगल में हाथ डालकर दूसरे पहलवान को नीचे गिराने वाले तेघा दांव से भी अंक अर्जित किया।