सोनीपत। गांव पिपली में पूर्व सरपंच के यहां फायरिंग व एक व्यक्ति को गोली मारने के मामले में आरोपी को जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई। आरोपी एक माह से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष एवं शासकीय अधिवक्ता की जिरह सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बसवाना सरताज बसवाना ने आरोपी की जमानत मंजूर करने का आदेश दिया है।
23 अक्तूबर को खरखौदा थाना में पिपली गांव निवासी नवीन ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। नवीन के चाचा रामनिवास गांव के सरपंच रहे हैं। सरपंची के कार्यकाल के दौरान उनका भूपेंद्र और जितेंद्र से झगड़ा हुआ था। जिसके बाद दोनों पक्षों में दुश्मनी हो गई। आरोप लगाया कि भूपेंद्र और जितेंद्र अपने साथियों के साथ अवैध शराब के व्यापार और संगठित अपराध में लिप्त रहे हैं। 23 अक्तूबर की सुबह 10 बजे नवीन अपने भाई
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सुरेश, अपने मामा के बेटे दीपक, राजू, भगत के साथ घर के आंगन में बैठकर बातें कर रहे थे। इसी दौरान देखा कि भूपेंद्र, उसका भाई जितेंद्र निवासी सिसाना, दिशांत उर्फ ओकी, आकाश, टीनू और दिशांत और 10 अन्य व्यक्ति पिस्तौल, रॉड और डंडे लिए हुए पूर्व सरपंच रामनिवास के प्लॉट की ओर आ रहे थे। हमलावर प्लॉट में जबरन घुस आए।
आरोपियों ने सुरेश और भगत को लाठियों से पीटा था। नवीन व दीपक ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो भूपेंद्र, जितेंद्र, दिशांत उर्फ ओकी और टीनू ने पिस्तौल से उन पर जान से मारने की नीयत से गोलियां चला दीं। भूपेंद्र की ओर से चलाई गई गोली नवीन की जांघ में लगी थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
हमलावरों में जिला झज्जर के गांव माजरी निवासी विनय का भी नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने विनय को गिरफ्तार कर उसके पास से हमले में प्रयुक्त बिट्टा बरामद होने का दावा किया। हालांकि कि उसका नाम प्राथमिकी में नहीं था। विनय ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपनी जमानत याचिका डाली। उसके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी का नाम प्राथमिकी में नहीं था।
शिकायतकर्ता को केवल एक गोली लगी थी। राम निवास और शिकायतकर्ता नवीन आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। प्राथमिकी दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है। उधर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोप गंभीर हैं। बचाव पक्ष एवं शासकीय अधिवक्ता की जिरह सुनने के बाद न्यायाधीश सरताज बसवाना ने आरोपी की जमानत मंजूर करने का आदेश दिया।
आरोपी को एक लाख रुपये के बांड और समान राशि के एक जमानती को प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत दी जाएगी। ट्रायल के दौरान आरोपी अभियोजन पक्ष के गवाहों से किसी भी तरह से संपर्क या उन्हें प्रभावित नहीं करेगा।