सोनीपत। भाजपा ने सोनीपत विधानसभा सीट से पंजाबी दांव खेलते हुए नगर निगम मेयर निखिल मदान को चुनाव मैदान में उतारा है। निखिल मदान हाल ही में कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल हुए हैं। वहीं, गोहाना से विरोध के बावजूद रोहतक के पूर्व सांसद डाॅ. अरविंद शर्मा को मैदान में उतारकर सभी चौंका दिया है। भाजपा को यहां जीत का खाता खुलने का इंतजार है। आरक्षित सीट खरखौदा से भी भाजपा ने जजपा के पूर्व प्रत्याशी व हाल ही में पार्टी में शामिल हुए पवन खरखौदा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। ऐसे में भाजपा ने नए चेहरों पर विश्वास जताया है।
भाजपा ने बुधवार को देर शाम हरियाणा में विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। 90 में से 67 विधानसभाओं के लिए प्रत्याशी घोषित किए हैं। इसमें खरखौदा, गोहाना और सोनीपत भी शामिल हैं। गन्नौर, राई व बरोदा विधानसभा में अभी टिकट का इंतजार रहेगा। भाजपा ने तीन सीटों पर नए चेहरों पर विश्वास जताया है। इससे विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि टिकट की आस लगाए बैठे नेता नए चेहरों का समर्थन करते हैं या नहीं।
निखिल मदान : वर्ष 2020 में निखिल मदान ने कांग्रेस की ओर से सोनीपत नगर निगम का पहला चुनाव लड़ते हुए भाजपा प्रत्याशी ललित बतरा को करीब 13000 वोटों से हराया था। निखिल मदान सोनीपत में युवा पंजाबी नेता के तौर पर उभरे हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा व सांसद दीपेंद्र हुड्डा का बेहद करीबी माना जाने लगा था। हाल ही में वह कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल हो गए थे।
डॉ. अरविंद्र शर्मा : गोहाना से भाजपा ने जिन डाॅ. अरविंद शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है, वह वर्ष 1996 में सोनीपत, 2004 व 2009 में करनाल और वर्ष 2019 में रोहतक से सांसद रह चुके हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में रोहतक से वह कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा से चुनाव हार गए थे। अब वह भाजपा की टिकट पर गोहाना से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे हैं। भाजपा को यहां 57 साल के इतिहास में पहली जीत की उम्मीद है।
पवन खरखौदा : आरक्षित सीट खरखौदा से भाजपा ने पवन खरखौदा को टिकट दिया है। पवन इससे पहले वर्ष 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। वह कांग्रेस के जयवीर वाल्मीकि से हार गए थे। वहीं, अगले ही चुनाव में वह जजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे तो हुड्डा के गढ़ में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि अपने विपक्षी को कड़ी टक्कर देने से वह सुर्खियों में आए थे। बड़ा वोट बैंक साथ होने का उन्हें लाभ मिला है।