शिक्षा विभाग की तरफ से निर्धारित की गई रेशनेलाइजेशन नीति का अध्यापकों के साथ ही ग्रामीणों ने भी विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को खरखौदा के गांव झरोठ स्थित राजकीय उच्च विद्यालय गेट पर ताला जड़ ग्रामीणों ने नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि रेशनेलाइजेशन नीति के तहत शिक्षा विभाग ने स्कूल में शिक्षकों के 8 पदों में से 4 खत्म कर दिए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। गांव शहजादपुर व मंडोरा में भी ग्रामीणों ने रेशनेलाइजेशन नीति के विरोध में प्रदर्शन किया।
शिक्षा विभाग की नई रेशनेलाइजेशन नीति के तहत अब 45 से 50 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। इससे पहले 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक था। विभाग ने यह व्यवस्था कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 के लिए लागू की है। 90 बच्चों तक दो, 130 तक तीन और 170 तक विद्यार्थी होने पर शिक्षकों के चार पद स्वीकृत किए जाएंगे। इसके आधार पर ही स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से विद्यार्थी संख्या मांगी थी। अब उसी के अनुसार शिक्षकों के पद दिए जाए रहे हैं। इससे स्कूलों में शिक्षकों के कई पद खत्म किए जा रहे हैं। जिसका शिक्षकों के साथ ही ग्रामीणों ने भी विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होंगे तो यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी कैसे देश के भावी डॉक्टर, इंजीनियर व वैज्ञानिक बन पाएंगे।
खरखौदा खंड के गांव झरोठ स्थित राजकीय उच्च विद्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने पहले नई रेशनेलाइजेशन नीति के विरोध में प्रदर्शन किया, फिर स्कूल पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि नई नीति से गांव के स्कूल से अध्यापकों के चार पद खत्म कर दिए हैं। स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, चित्रकला, विज्ञान, पीटीआई, सामाजिक विज्ञान, गणित व संस्कृत विषय के अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं। नई नीति लागू होने के बाद स्कूल से हिंदी, अंग्रेजी, चित्रकला व विज्ञान विषय के पद समाप्त करने की बात कहीं जा रही है।
गांव शहजादपुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भी ग्रामीणों ने स्कूल गेट पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्कूल में करीब 400 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल से टीजीटी गणित व पीजीटी जीव विज्ञान का पद खत्म कर दिया गया है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि स्कूल में आवश्यक विषयों के शिक्षकों के पद रखे जाएं।
गांव मंडोरा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से नई रेशनेलाइजेशन नीति के तहत शिक्षकों के पद खत्म करने के विरोध में ग्रामीणों ने स्कूल गेट पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि इससे पहले मंडोरा स्कूल से वाणिज्य व अर्थशास्त्र के अध्यापकों का स्थानांतरण हो चुका है। अब विज्ञान के अध्यापक का स्थानांतरण भी हो गया है। जिससे स्कूल में अर्थशास्त्र, विज्ञान, वाणिज्य का कोई भी अध्यापक नहीं है। इस मौके पर अजय, सुरेंद्र, विजेंदर, अनिल, संजीव, सुरेंद्र, रणधीर, ताराचंद, सतीश, वीरमति, राजरानी, सोनिया कमला सहित अन्य मौजूद रहे।
सिरसाढ़ में ग्रामीणों ने स्कूल का गेट बंद कर किया प्रदर्शन
गोहाना। शिक्षा विभाग की नई रेशनलाइजेशन नीति के विरोध में सोमवार को गांव सिरसाढ़ के ग्रामीण राजकीय उच्च विद्यालय पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने स्कूल का गेट बंद कर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने राजकीय विद्यालय से शिक्षकों के तबादले पर कड़ा एतराज जताया। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की शिक्षकों के ऑनलाइन तबादलों की नीति ठीक नहीं है। ऑनलाइन तबादला नीति में राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के पद कम किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से विद्यालय के शिक्षकों के तबादले नहीं करने की मांग की है। ग्रामीण राजकीय उच्च विद्यालय के बाहर एकत्रित हुए और शिक्षकों के तबादले करने पर नाराजगी जाहिर की। ग्रामीण सुरेंद्र लठवाल ने कहा कि विद्यालय में पहले ही शिक्षकों की कमी है। अब विद्यार्थियों की संख्या कम होने का बहाना कर शिक्षकों के तबादले किए जा रहे हैं। ऑनलाइन तबादला नीति में शिक्षक दूरदराज के गांवों के विद्यालयों के विकल्प बहुत कम भरते हैं। इससे शिक्षकों की कमी हो जाती है। ग्रामीणों ने विद्यालय के शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगाने की मांग की। इस मौके पर सुनील, प्रेम प्रकाश, अनिल, जसमेर, दीपक, पंजाब व सतीश मौजूद रहे।
गांव जगदीशपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के गेट पर प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद- फोटो : Sonipat