सोनीपत। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से संबद्ध हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान नरेंद्र चहल ने कहा कि 17 अप्रैल के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले अनुसार 16 और 18 जून 2014 की हरियाणा सरकार की नियमितीकरण की नीतियों को वैध करार दिया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत सभी अतिथि अध्यापक इन दोनों नीतियों के तहत नियमित होने की सभी शर्तों को पूरा करते हैं। अत: तत्काल प्रभाव से सभी अतिथि अध्यापकों को नियमित किया जाए और जून 2014 से सभी लाभ प्रदान किए जाएं।
उन्होंने बताया कि 2014 में हरियाणा सरकार ने ग्रुप बी, सी एवं डी के तहत कार्यरत सभी कच्चे कर्मचारियों/शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए नीतियां बनाई थीं। इनके तहत कई विभागों के 4654 कर्मचारियों को पक्का किया गया था।
संगठन के लगातार प्रयास से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के लिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने वित्त सचिव शिक्षा विभाग को 9 सितंबर 2014 को लिखित आदेश दिया था लेकिन इसके दो दिन बाद ही विधानसभा चुनाव की घोषणा के चलते आचार संहिता लगने के कारण अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का मामला अधर में लटक गया।
सभी शर्तों को पूरा करने के बावजूद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापक नियमित होने से वंचित रह गए। इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया लेकिन इसके बाद जून 2018 में इन नीतियों के खिलाफ लगी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इन नीतियों को रद्द कर दिया। तत्पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने 26 नवंबर 2018 को यथास्थिति बरकरार रखते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी। अब इस पर 17 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए इन नीतियों को वैध करार दिया गया है।
इसलिए संगठन मांग करता है कि तुरंत प्रभाव से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अनुपालना में सभी अतिथि अध्यापकों को जून 2014 से नियमित किया जाए। विज्ञप्ति जारी करने वालों में राज्य सचिव जोगिंदर सिंह, जिला सचिव दिनेश छिक्कारा, जिला कोषाध्यक्ष रोहतास गंगाना, ब्लॉक सोनीपत प्रधान ऋषिकेश, जिला ऑडिटर कुलदीप सिंह आदि शामिल हैं।