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जो काम कृषि वैज्ञानिक नहीं कर सके, आपने कर दिखाया

Mon, 16 Nov 2015 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला (राई) सोनीपत
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गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर बढ़खालसा गांव पहुंचे सीएम मनोहर लाल खट्टर अचानक यमुना से सटे गांव मनौली जा पहुंचे। सीएम ने यहां के प्रगतिशील किसानों से मुलाकात की। मनौली, अटेरना व आसपास के गांवों में वैज्ञानिक तरीके से की जा रही स्वीट्स-बैबी कॉन व मशरूम की फसल पर सीएम फिदा हो गए।
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किसानों से बोले, जो काम कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक नहीं कर सके, वह आप ने कर दिया। आप प्रस्ताव करके दो, मैं कृषि टूरिज्म को बढ़ावा दूंगा। मनौली गांव की इतनी उपजाऊ जमीन खनन के लिए नहीं दी जाएगी। साथ में सीएम ने एरिया में कन्या कॉलेज खोलने की घोषणा की, लेकिन इसके लिए किसानों को जमीन उपलब्ध करानी होगी।

दोपहर करीब 12 बजे सीएम का हेलीकाप्टर राई स्पोर्ट्स स्कूल के हैलीपैड पर उतरा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सीएम को बढ़खालसा के स्मारक पर जाना था, लेकिन अचानक कार्यक्रम बदला और सीएम मनौली गांव पहुंच गए। वहां प्रगतिशील किसानों द्वारा आधुनिक तरीके से की जा रही खेती के तरीके का अवलोकन किया।
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साथ ही पॉली हाउस में वातावरण कंट्रोल कर की जा रही खेती का निरीक्षण किया। सीएम ने कहा कि कृषि की नई तकनीकों का प्रयोग करके कम जमीन में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है और ऐसा मनौली गांव के किसानों ने करके दिखाया है।

इतनी उपजाऊ जमीन नहीं दी जाएगी खनन के लिए
मनौली के खेतों में लहलहाती फसल देखकर सीएम ने कहा कि वास्तव में गांव मनौली की भूमि उपजाऊ है और यहां की लहलहाती फसलें इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि मनौली की जमीन को खनन के लिए दिया जाना किसी भी तरीके से सही नहीं था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने खनन को रद करने का फैसला लिया।

आप जमीन दो, कन्या कॉलेज खोला जाएगा
इसके बाद सीएम गांव में पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने स्वागत किया। ग्रामीणों ने मांग रखी कि इस एरिया में पास लड़कियों के लिए कॉलेज नहीं है। इस पर सीएम ने कहा कि अगर ग्रामीण जमीन उपलब्ध करवा देते हैं तो ग्रामीण एरिया में अगले शैक्षणिक सत्र से कन्या कॉलेज खोल दिया जाएगा।

एक से 20 लाख कमा लेते हैं मनौली व अटेरना के किसान
केंद्रीय कृषिमंत्री से दो लाख तक का पुरस्कार हासिल कर चुके प्रगतिशील किसान कंवल सिंह चौहान ने बताया कि मनौली व अटेरना की जमीन यमुना के साथ होने के चलते काफी उपजाऊ है। यहां साल में तीन बार स्वीट्स व बैबी कॉन की फसल ली जाती है। खर्च निकाल कर एक से डेढ़ लाख की बचत है। मशरूम से तो किसान 20 लाख तक कमा सकता है। नजदीक आजादपुर मंडी में सारा माल भेजा जाता है।
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