सोनीपत। कृषि विभाग मोटा अनाज और नकदी फसल को बढ़ाने देने के लिए पहल शुरू कर दी है। जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर के चलते इस वर्ष कृषि विभाग मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम को बढ़ाते हुए किसानों को धान की जगह मोटा अनाज उगाने के लिए प्रेरित करेगा। इसके साथ ही देश में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव से बारिश कम होने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में कृषि विभाग ने कम सिंचाई वाला मोटा अनाज उगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने का निर्णय लिया है। गिरते भूजल स्तर के चलते पहले ही सोनीपत का गन्नौर व राई क्षेत्र डार्क जोन में जा चुका है। ऐसे में यहां धान की फसल उगाना जल संकट का कारण बनता जा रहा है।
खरीफ सीजन के दौरान जिले में करीब 1.60 लाख हेक्टेयर में फसल उगाई जाती है। जिसमें 90 हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई, करीब 30 हजार हेक्टेयर में सब्जी, 10 हजार हेक्टेयर में ज्वार, 6 हेक्टेयर में बाजरा के अलावा मक्का सहित अन्य फसलों का उत्पादन किया जाता है। कृषि विभाग धान को कम उगाने के लिए प्रेरित करने शुरू कर दिया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भी इसे लेकर अलर्ट जारी कर चुका है। ऐसे में भूजल बचाने के लिए कृषि विभाग मोटे अनाज की फसल उगाने की सलाह दे रहा है। इसे लेकर पिछले दिनों मुख्य सचिव ने भी कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर अल नीनो के प्रति आगाह करने के साथ ही किसानों को मोटा अनाज उगाने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया है।
मोटे अनाज के साथ नकदी फसल को बढ़ावा दिया जाएगा
सरकार ने ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और चौलाई को मोटा अनाज में शामिल किया है। किसानों को यह फसल अधिक से अधिक उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हालांकि सोनीपत में इसमें से ज्वार, बाजरा व चौलाई की खेती को अधिक उगाने की सलाह दी जाएगी। अन्य मोटे अनाज की फसल यहां नहीं उगाई जाती है। इनके लिए भी आगे संभावना तलाशी जा सकती है। इसके साथ ही किसानों को नकदी फसल कपास व सब्जी के उत्पादन को बढ़ाने को प्रेरित किया जाएगा।
ये है अल नीनो
कृषि अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ ने बताया कि मुख्य सचिव के साथ बैठक में इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव रहने के लिए आगाह किया गया। यह वैश्विक जलवायु प्रणाली का हिस्सा है। यह सामान्य समुद्री सतह के तापमान को अधिक गर्म कर देता है। इसकी उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के बीच भूमध्य रेखा पर होती है। भूमध्य रेखा के दोनों ओर अक्षांश की तरफ विचरण करती है। इससे पूर्वी प्रशांत महासागर क्षेत्र के सतह पर उच्च हवा का दबाव होता है। मौसम के स्वरूप पर इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम को औसत से अधिक गर्म कर देता है। जिसका असर भारत पर भी पड़ता है। इससे भारत में औसतन कम वर्षा होती है।
मोटे अनाज की जानकारी को शहर में लगाए जाएंगे डिस्प्ले
मोटा अनाज सेहत सुधारने के लिए आवश्यक है। इसे उगाने के लिए प्रेरित करने के साथ ही कृषि विभाग लोगों की थाली तक भी मोटा अनाज पहुंचाने की कवायद करेगा। जिसके चलते शहर में जगह-जगह डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। जिसके माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी जाएगी कि मोटा अनाज शहर में किस दुकान पर और कितने मूल्य में उपलब्ध है। साथ ही मोटे अनाज को जिलावासियों की थाली तक पहुंचाने के लिए सोनीपत कृषि विभाग एएनएम और आंगनबाड़ी वर्कर्स को भी अहम जिम्मेदारी देगा। वह लोगों को इसे लेकर जागरूक करेंगी।
सोमवार को आयोजित होगा जिलास्तरीय मेला
कृषि विभाग ने लोगों की थाली में मोटा अनाज पहुंचाने के लिए लोगों को जागरूक करने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए सोमवार को सोनीपत की नई अनाज मंडी में जिलास्तरीय मेले का आयोजन किया जाएगा। जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मनाया जा रहा है। लोगों की थाली में मोटा अनाज पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की गई है। किसानों को मोटा अनाज उगाने को प्रेरित किया जाएगा। मोटा अनाज उगाने में दो-चार सिंचाई से काम चल जाता है। नकदी फसलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। -डॉ. अनिल सहरावत, उपनिदेशक कृषि विभाग सोनीपत