गांव भैंसवाल कलां के पहलवान योगेश्वर दत्त ने इंचियोन में आयोजित एशियन खेलों मेें अपना परचम लहराया और स्वर्ण पदक हासिल किया। स्वर्ण पदक जीतने की बात गांव में फैलते ही लोग खुशी से नाच उठे और मिठाईयां बांटी गईं। इस मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और डीजे बजाकर नाचते नजर आए।
योगेश्वर की मां अपने बेटे के प्रदर्शन से काफी खुश नजर आई। मां सुशीला देवी ने भी ग्रामीणों को मिठाई खिलाई। हालांकि एक तरफ गांव के लोग बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ खफा भी नजर आए। उन्होंने मांग की कि जब भी म्हारे छोरे योगी का मैच हो विभाग बिजली न काटे।
मेरा लाडला बेटा है योगी : सुशीला
पहलवान योगी की मां सुशीला देवी ने कहा कि उसके बेटे ने उसके दूध को लजाया नहीं बल्कि देशहित में उनके नाम को रोशन किया। उन्होंने कहा कि योगेश्वर दत्त की बचपन की हरकतों को देखकर उसे डांट फटकार को याद किया जाता है तो वह सब गलत लगती हैं, क्योंकि वह सोचती थी कि कही गलत संगत में न चला जाए योगी।
पर उसके बेटे ने जिस तरह से अपनी मां के दूध और देश की लाज को पूरे विश्व में बढ़ाया है वह उसकी आभारी है। पूरे देश को उसके बेटे पर नाज है और उसकी मां को भी गर्व है कि योगी उसकी कोख से पैदा हुआ। सुशीला ने उसे हजारों साल जीने की दुआ दी। उन्होंने कहा कि उनकी बेटे मुकेश के पुत्र दीपांशु को भी एक अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बनाने की तमन्ना है। अभी इस बच्चे की उम्र कैम है, लेकिन आगे चलकर उनका पोता ताऊ योग के पदचिन्हों पर चलकर एक नंबर का पहलवान बनेगा। योगी के पिता राममेहर सिंह का 2006 में देहांत हो गया था।
वे अध्यापक थे। पिता के देहांत के बाद भी योगी ने बिना हिम्मत हारे पहलवानी जारी रखी। मां ने बताया बहन कविता, सीमा, रेणु और छोटे भाई मुकेश आदि कई भाई-बहनों के बीच से निकलकर योगेश्वर कड़ी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचा है। योगेश्वर पहले गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ता था। यहां से 12वीं पास करने के बाद उसने महर्षि दयानंद विवि से स्नातक किया।
कुछ ऐसे बना योगी हीरो
मां सुशीला देवी ने अपने लाडले योगी कि हीरोगीरी के बार में विस्तार से बताया और कहा कि योगी केवल 12 वर्ष की उम्र में अखाड़े में जाकर पहलवान बनने की सीख लेने लगा था। उसके सिर पर कुश्ती का भूत सवार था। उन्होंने कहा कि गांव के बाहर बलराज अखाड़ा है। वहां पर पहुंचते ही योगी कुश्ती लड़ना शुरू कर देता था।
योगेश्वर जीत चुका है सवा सौ से अधिक पदक
-सबसे पहले उसने वर्ष 1999 में पोलैंड में वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में 14 से 17 के आयु वर्ग में गोल्ड मेडल का झटका। ये पदक प्राप्त कर उसने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन किया था ।
-उसके बाद 2002 में इरान में आयोजित नूरी कप और जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।
-वर्ष 2003 में कनाडा में कामनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और कनाडा कप में रजत पदक जीता। उसी वर्ष दिल्ली में आयोजित जन नायक चौ. देवीलाल कप में कांस्य पदक झटका।
-वर्ष 2004 में बुल्गारिया में दूसरे ओलंपिक क्वालिफाई टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया।
-2005 में अमेरिका में आयोजित अमेरिका कप में कांस्य पदक जीता। उसके बाद साउथ अफ्रीका में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। साउथ अफ्रीका में ही आयोजित कॉमनवेल्थ जीआर में रजत, शताब्दी कप में स्वर्ण और शताब्दी जीआर में रजत पदक झटका।
-2006 में दोहा में एशियन खेलों में कांस्य पदक हासिल किया।
-2007 में कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ ईआर और जीआर चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते।
-2008 में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद चीन के बीजिंग में आयोजित ओलंपिक प्रतिस्पर्धा में सराहनीय प्रदर्शन किया।
-2009 में भी विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक झटके देश का नाम रोशन कर दिखाया।
-2010 में एशियाड चैंपियनशिप और दिल्ली में 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
-हाल में योगेश्वर दत्त के पास 40 स्वर्ण पदक, 60 रजत व 20 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं।