सोनीपत। एंटी करप्शन ब्यूरो ने उपायुक्त के निजी सहायक को साढ़े तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब उपायुक्त का ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने चार्ज भी छोड़ दिया था, लिहाजा सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिले में उपायुक्त ही नहीं थे तो भला लिपिक का ट्रांसफर कौन कर सकता था। इस वजह से गिरफ्तार निजी सहायक से कई बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।
बताया जाता है कि निजी सहायक बेहद ठाठ से रहता था, लिहाजा कर्मचारियों से रिश्वत मांगने के और भी मामले सामने आ सकते हैं। हालांकि अभी एक शिकायतकर्ता ही सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने शुक्रवार को जिला प्रशासनिक परिसर में छापा डालकर उपायुक्त के निजी सहायक शशांक शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
उपायुक्त कार्यालय में ही तैनात लिपिक जितेंद्र कुमार को राई तहसील में रजिस्ट्री क्लर्क के पद पर ट्रांसफर कराने के नाम पर उसने रिश्वत मांगी थी। शशांक शर्मा के कारनामों की फेहरिस्त लंबी है। एंटी करप्शन ब्यूरो को इस बात की अच्छी तरह से जानकारी है। इस वजह से टीम उसे लेकर उसके घर तलाशी ली।
तलाशी में लाखों की नकदी के साथ, सोने-चांदी के आभूषण मिले हैं। उसकी आय के हिसाब मिली नकदी वह आभूषण ज्यादा हैं। हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो ने अभी सार्वजनिक नहीं किया है कि क्या क्या मिला है, लेकिन कार्रवाई की जद में और भी लोगों के आने की संभावना है। सबसे हैरानी की बात यह है कि पिछले सप्ताह उपायुक्त डाॅ. मनोज कुमार का स्थानांतरण हो गया था डाॅ. मनोज कुमार ने वीरवार को चार्ज छोड़ दिया था।
उन्होंने चंडीगढ़ में नई तैनाती पर कार्यभार ले लिया। जनपद में नए डीसी सोमवार को चार्ज लेंगे, ऐसे में प्रश्न उठता है निजी सहायक शशांक शर्मा ने किस बहाने जितेंद्र कुमार से रिश्वत ले ली।