1.12 करोड़ के वाटर कूलर और डस्टबिन खरीद घोटाले में चार बीडीपीओ चार्जशीट
अंकित चौहान
सोनीपत। पंचायतों में वाटर कूलर व डस्टबिन खरीद में 1.12 करोड़ का घपला करने वाले बीडीपीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए पिछले कई साल से दबी पड़ी फाइल को निकलवा लिया गया है। अमर उजाला ने फाइल दबी होने का मामला उजागर किया तो पंचायत विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल ने फाइल को निकलवाकर चार बीडीपीओ को चार्जशीट किया है। भाजपा के पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने पंचायतों के लिए वाटर कूलर व डस्टबिन खरीद में 1.12 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा कराया था, जिसके बाद डीसी की रिपोर्ट में पांच बीडीपीओ को दोषी मानकर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। उनमें से एक बीडीपीओ को चार्जशीट नहीं किया गया है, जिसकी जांच दोबारा कराई जा सकती है।
हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने वर्ष 2016 में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में घपले का मामला उठाया था। जांगड़ा ने आरोप लगाए थे कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटर कूलर, डस्टबिन, आरओ सिस्टम तथा स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था। वित्त आयोग की ओर से 209 करोड़ रुपये पूरे हरियाणा में पंचायतों के खाते में आए थे, जिसमें से सोनीपत जिले को छह करोड़ रुपये मिले थे। प्रदेश में 2015 के आखिर में सरपंचों का कार्यकाल खत्म होने पर गांवों में बीडीपीओ को प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिनके पास 2016 में चुनाव होकर शपथ लेने तक उनके पास ही पंचायतों की जिम्मेदारी थी। इस दौरान ही पांच ब्लॉक के बीडीपीओ ने पंचायतों के खातों में जमा करोड़ों रुपये निकालकर डस्टबिन व वाटर कूलर खरीदे थे। इनकी कीमत लाखों में दिखाई गई थी, लेकिन वास्तव में कीमत काफी कम थी। बाजार में उस समय प्रति डस्टबिन की कीमत 900 रुपये थी, जबकि खरीद कीमत 3500 रुपये दिखाई गई थी। वहीं बाजार में प्रति वाटर कूलर की कीमत 35 हजार रुपये है, जबकि अधिकारियों द्वारा इसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये बताई गई थी। इसकी जांच डीसी केएम पांडुरंग को सौंपी गई थी।
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डीसी की रिपोर्ट में दोषी मिले थे बीडीपीओ
डीसी केएम पांडुरंग की जांच में तत्कालीन गन्नौर बीडीपीओ पूनम चंदा, खरखौदा बीडीपीओ सुमित बख्शी, गोहाना बीडीपीओ इकबाल राठी, सोनीपत बीडीपीओ राजेश कुमार, राई बीडीपीओ राम सिंह दोषी मिले थे। जिनपर 1.12 करोड़ रुपये के घपले का आरोप था और इसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व शासन को भेजी गई थी। लेकिन दो साल होने के बाद भी मामले में कुछ नहीं किया गया था। इसमें भोगीपुर राजलू गांव के नरेंद्र राठी की ओर से एक शिकायत पीएम नरेंद्र मोदी के नाम भी भेजी गई थी, जिसमें पूरे मामले को बताते हुए सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया था।
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अमर उजाला ने फाइल दबाने का किया था खुलासा, चार बीडीपीओ चार्जशीट
इस मामले की फाइल को दो साल से दबाकर रखने का खुलासा अमर उजाला ने किया था और 16 दिसंबर के अंक में पूरा मामला प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल ने फाइल को निकलवाया और उसमें पूरी स्थिति को देखते हुए पूनम चंदा, इकबाल राठी, राजेश कुमार, राम सिंह को चार्जशीट किया है। सुमित बख्शी को अभी चार्जशीट नहीं किया गया है, जिनकी फाइल को अभी देखा जा रहा है। इस तरह मामले में जांच के बाद की कार्रवाई की गई है।
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इस तरह हुआ खुलासा
-गन्नौर ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आरओ सिस्टम, वाटर कूलर व स्टेबलाइजर के सेट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए। ये सामान 99 लाख 78 हजार 255 रुपये में खरीदा गया बताया गया है। इस कीमत में टैक्स भी शामिल है, जबकि जांच में पाया गया इस सामान की बाजार में कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपये है।
-खरखौदा ब्लॉक की 19 ग्राम पंचायतों के लिए एक वाटर कूलर सेट व 833 डस्टबिन खरीदे थे। इनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए बताई गई थी, जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए मिली है।
-गोहाना की 31 पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सेट व 1871 डस्टबिनों की खरीद की। इनकी कीमत एक करोड़ आठ लाख 45 हजार 340 रुपये बताई गई थी, जबकि इनका बाजार भाव जांच में 72 लाख 14 हजार 27 रुपये मिला है।
-सोनीपत ब्लॉक की 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीद थे। इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपये पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार रुपये में बताई गई थी।
-राई की एक पंचायत के लिए 70 डस्टबिन खरीदे और इनकी कीमत पांच लाख 74 हजार 700 रुपये बताई गई थी। इनकी वास्तविक कीमत पांच लाख 45 हजार रुपये मिली है।
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जिन पांच बीडीपीओ पर घपले के आरोप लगे थे, उनमें से चार को प्रधान सचिव ने चार्जशीट किया है। इस मामले में यहां से भी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है और इसमें शासन स्तर से आगे की कार्रवाई चल रही है।
-एनएस धनखड़, डीडीपीओ