अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। गांव कुमासपुर स्थित गोशाला में 12 गोवंश की मौत के बाद गोसेवकों के साथ ही संत गोपालदास ने भी रोष जताया। गोवंश की दुर्दशा से आहत संत गोपालदास रविवार शाम सेक्टर-15 स्थित कैबिनेट मंत्री कविता जैन के निवास पर पहुंच गए और गोवंश की बेकद्री को लेकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने गोवंश को उपयुक्त सुविधा मुहैया करवाने की मांग की। संत गोपालदास के धरने पर बैठते ही भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव जैन उनके पास पहुंचे और गोवंश को सभी सुविधाएं मुहैया करवाने का आश्वासन दिया। राजीव जैन द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद संत गोपालदास ने 15 मिनट बाद धरना समाप्त कर दिया। भाजपा नेता ने कुमासपुर गोशाला की देखरेख का जिम्मा संस्था को देने का आश्वासन दिया है।
गांव कुमासपुर स्थित गोशाला में शनिवार को 12 गोवंश की मौत हो गई थी। गोवंश की मौत से गुस्साए गोसेवकों ने आरोप लगाया था कि यहां गोवंश को पर्याप्त चारा नहीं मिलता, न ही यहां पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है। साथ ही गोवंश की संख्या के अनुरूप शेड भी नहीं है। जिससे गोवंश सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे ठिठुरने व मरने को मजबूर हैं।
गोशाला में गोवंश की मौत से गुस्साए संत गोपालदास रविवार शाम को सेक्टर-15 स्थित कैबिनेट मंत्री कविता जैन के आवास पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इस पर भाजपा नेता राजीव जैन उनके पास पहुंचे और बातचीत की। संत गोपालदास ने बताया कि कुमासपुर की गोशाला की देखरेख नगर निगम करता है। गोशाला कमाई का साधन नहीं है, यही कारण है कि उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया जा रहा। अगर यह कमाई का साधन होती तो शायद इसकी तस्वीर ही कुछ ओर होती। उन्होंने कहा कि गोवंश को बेमौत नहीं मरने दिया जाएगा। संत गोपालदास ने मांग की है कि गोशाला में गोवंश को पर्याप्त चारा व ठंड से बचाने की व्यवस्था की जाए। इस पर राजीव जैन ने कहा कि गोशाला को संस्था के सुपुर्द किया जाएगा, ताकि गोवंश की देखभाल सही प्रकार से हो सके। राजीव जैन से मिले आश्वासन के बाद संत गोपालदास धरना खत्म करने पर राजी हुए। इस दौरान वे 15 मिनट ही धरने पर बैठे।
भारतीय नवनिर्माण सेना ने जताया था रोष
गोशाला में अव्यवस्थाओं के खिलाफ शनिवार को भारतीय नवनिर्माण सेना ने रोष जताया था। सेना के जिलाध्यक्ष राम पाहुजा व अन्य सदस्यों को गोवंश की मौत पर हंगामा किया था। उन्होंने मुंडन कराकर विरोध जताया था। वहीं नव निर्माण सेना ने गोशाला को संस्था को दिए जाने के बजाय बेहतर व्यवस्था करने की मांग की।