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77 आउटसोर्स कर्मियों को काम से निकाला, सिविल सर्जन कार्यालय पर दिया धरना

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सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे ठेका कर्मी नारेबाजी करते हुए। संवाद - फोटो : Sonipat
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स्वास्थ्य विभाग ने आउटसोर्स पर लगे 77 कर्मियों को झटका देते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन कर्मियों को कोरोना काल में एक सितंबर 2020 को काम पर रखा गया था। सरकार की ओर से एजेंसी का ठेका नहीं बढ़ाने पर कर्मियों ने रोष जताया और सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में धरना दिया। उनका आरोप है कि कोरोना महामारी में लोगों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठेका नहीं बढ़ाने के कारण उनका रोजगार छीन लिया है। उन्होंने उप सिविल सर्जन डॉ. सीताराम को मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपकर दोबारा नौकरी पर रखने की मांग की।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना काल के दौरान 1 सितंबर 2020 को आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन, चालक व चतुर्थ श्रेणी समेत अन्य पदों पर 77 कर्मचारियों को भर्ती किया गया था। इनमें 30 स्टाफ नर्स, 10 लैब तकनीशियन, 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 6 डाटा एंट्री ऑपरेटर, 5 चालक, 3 अनुसंधान सहायक, 2 पब्लिक हेल्थ मैनेजर व एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट शामिल हैं। अब कोरोना का प्रकोप कम होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस दिए बिना कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। उनका कहना है कि जब वह नौकरी कर रहे थे तो उन्हें कोरोना योद्धा कहा जाता था। एक तरफ कोरोना योद्धा का सम्मान मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार ने उनका रोजगार छीनने का काम किया है। इससे हटाए गए कर्मियों में रोष है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनको नौकरी पर वापस नहीं रखा तो वह परिवार सहित धरने पर बैठ जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस दौरान सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राममेहर शर्मा, राजीव खत्री, संदीप तूर समेत आशीष, रविन, संतोष, सरिता, मंजू, श्वेता, रश्मि, प्रगति, मोनू, शिवकुमार, साहिल, ज्योति, नीतू, एकता, सोनिया व रेणू मौजूद रहे।
यह बोले हटाए गए कर्मचारी
सरकार की ओर से स्थायी रोजगार नहीं दिया जा रहा है। कच्चे कर्मियों को हटाया जा रहा है। सरकार की अनदेखी के कारण देश व प्रदेश में बेरोजगारी फैली हुुई है। सितंबर 2020 से कोरोना महामारी में लोगों के इलाज के दौरान ड्यूटी दी। कोरोना के केस खत्म होने के बाद सरकार ने कच्चे कर्मियों की अनदेखी की है।
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- सविता
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कोरोना महामारी में जब पक्के कर्मियों ने मरीजों का इलाज करने से मना किया। उस समय अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में उन्हें ड्यूटी पर रखा गया। मरीजों की देखरेख करते समय परिवार के सदस्यों की परवाह किए बिना वह खुद भी कोरोना पॉजिटिव हुई। उसके बाद भी काम में कभी लापरवाही नहीं बरती। अब उन्हें काम से हटाकर सरकार ने धोखा किया है।
- रश्मि
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ड्यूटी के दौरान चार-चार माह से वेतन नहीं मिला, फिर भी लगातार ड्यूटी करती रही। अब सरकार की ओर से एजेंसी का ठेका नहीं बढ़ाने से युवाओं के साथ कुठाराघात किया जा रहा है। सरकार से मांग है कि उन्हें हरियाणा कौशल विकास निगम के पोर्टल पर पंजीकृत कर काम पर रखा जाए।
- सरिता
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सरकार की ओर से हटाए गए ठेका कर्मियों का वापस काम पर रखना चाहिए। ठेका कर्मियों को पक्का करने की योजना बनाई जानी चाहिए। प्रदेश में महंगाई की वजह से बेरोजगारी चरम पर है। बेरोजगारी दर कम करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। सभी को स्थायी रोजगार का प्रावधान करना चाहिए।
- शिवकुमार
वर्जन
कोरोना महामारी के दौरान 1 सितंबर को 2020 को तीन माह के लिए एजेंसी को सरकार ने ठेका दिया था। उसके बाद एजेंसी के ठेके का समय तीन-तीन माह बढ़ाया गया। 31 मार्च के बाद सरकार की ओर से एजेंसी का ठेका नहीं बढ़ाया गया है। इस कारण ठेका कर्मियों को हटाया गया है।
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- जयकिशोर, सिविल सर्जन, सोनीपत
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