दो साल से लगातार कर्मियों को निकाला जा रहा था। इससे करीब 250 कर्मचारी कंपनी में रह गए थे। कंपनी के कर्मियों के अनुसार मार्च 20 से मार्च 21 तक कर्मियों को आधा वेतन दिया गया। उसके बाद से वेतन देना बंद कर दिया गया। वहीं अब मिल्टन कंपनी पर ताला लगा दिया गया और सभी कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। इस तरह से उद्योग की सबसे बड़ी नींव कही जाने वाली एटलस ग्रुप की एक और कंपनी पर ताला लग गया।
मिल्टन में दो साल पहले तक हजारों साइकिल बनती थीं और कंपनी को ऑर्डर भी खूब मिल रहे थे। परिवार की खींचतान का असर कंपनी का पड़ता रहा और कर्मचारियों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया। अब अचानक कंपनी पर ताला लगा दिया गया और कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया गया। - सुरेंद्र सिंह, प्रधान मिल्टन साइकिल वर्कर्स यूनियन।
प्रबंधन के बीच चल रही खींचतान का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। एक साल से आधा वेतन दिया जा रहा था तो पिछले कई महीने से वेतन ही नहीं दिया गया। कंपनी को सही तरीके से चलाया जाए तो प्रबंधन व कर्मचारियों सभी के लिए बेहतर होगा। - सुरेंद्र मलिक, उप प्रधान।
कंपनी को बंद करने का मामला मेरे पास आया हुआ है, जिसमें प्रबंधन को बुलाया गया था तो उनकी ओर से सभी कागजात पेश किए गए। इसमें बताया गया कि उनके बीच कानूनी रूप से बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। उसके लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ में मामला चल रहा है। इसलिए ही एटलस सोनीपत व एटलस गाजियाबाद को पहले बंद कर दिया गया था और अब मिल्टन भी बंद कर दी गई। - सुनील नांदल, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर।