संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) योजना को इस खरीफ सीजन में किसानों का व्यापक समर्थन मिला है। जिले में किसानों ने 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर करीब 66 हजार एकड़ भूमि में धान की सीधी बिजाई का पंजीकरण कराया है।
कृषि विभाग सब्सिडी जारी करने से पहले प्रत्येक पंजीकृत खेत का भौतिक सत्यापन करेगा। इसके लिए विभाग ने 100 सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम खेतों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेगी कि संबंधित भूमि में वास्तव में धान की सीधी बिजाई की गई है या पारंपरिक रोपाई अपनाई गई है।
यदि निरीक्षण के दौरान किसी खेत में दूसरी फसल या गलत जानकारी दर्ज पाई गई तो उसकी रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी जाएगी। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों के खातों में 4,500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि जारी होगी।
जिले में खरीफ सीजन के दौरान 90 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती होती है। परंपरागत रोपाई पद्धति में सिंचाई के लिए अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसे भूजल स्तर गिरता है। इस चुनौती से निपटने के लिए कृषि विभाग लगातार किसानों को धान की सीधी बिजाई अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार धान की सीधी बिजाई का कार्य 15 मई से शुरू किया जा सकता है जबकि रोपाई की अनुमति 15 जून के बाद ही होती है। निर्धारित अवधि से पहले रोपाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है।
वर्जन
काफी संख्या में किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई है। पंजीकरण के बाद अब चरणबद्ध तरीके से खेतों का सत्यापन कराया जाएगा। जिला स्तरीय टीम के अलावा मुख्यालय की टीम भी नमूना जांच करेगी। सभी रिपोर्टों के मिलान के बाद पात्र किसानों को प्रति एकड़ 4,500 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। -वीरेंद्र आर्य, उपनिदेशक, कृषि विभाग, सोनीपत।