अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। गो संरक्षण और गो संवर्धन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करने वाली सरकार के आगे गोवंश ठंड की वजह से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं। शहरी निकाय मंत्री कविता जैन के घर से करीब 7 किमी दूर स्थित कुमासपुर में नगर निगम गोशाला में लगातार गोवंश की मौत हो रही। इसके बावजूद न मंत्री को उसकी फिक्र है और न ही अधिकारियों को इसकी सुध।
गोशाला में शनिवार के दिन भी एक दर्जन से ज्यादा गोवंश मरे हुए मिले। इसका पता चलने पर भारतीय नवनिर्माण सेना के पदाधिकारियों ने गोशाला में पहुंचकर अपने सिर मुंडवा लिए। वह अधिकारियों की आंख खोलने के लिए गोशाला के गेट पर बापू के बंदर बनकर धरने पर बैठ गए। वहां पहुंचे निगम कर्मियों से उन्होंने गोवंश का पोस्टमार्टम कराने की बात कही तो गोवंश के शव को गोशाला के अंदर ही जबरन दबा दिया गया।
कुमासपुर में तीन महीने पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से नगर निगम की ओर से गोशाला बनाई गई थी। यह गोशाला 2 हजार गोवंशों के लिए बनाई जानी है, लेकिन शहर को स्ट्रे कैटल फ्री करने के लिए उसे जल्द शुरू कर दिया गया। वहां 6 शेड बनाए जाने थे, लेकिन दो शेड बनाकर ही गोशाला में शहर से पकड़कर बड़े व छोटे गोवंश छोड़ दिए गए। नगर निगम के अधिकारियों ने गोशाला में गोवंश छुड़वा जरूर दिए, लेकिन उसके बाद उनकी देखरेख सही तरीके से नहीं की जाती है। वहां दो शेड में केवल 400 गोवंश रह सकते है, लेकिन वहां 1300 गोवंश छोड़े गए है। जिससे वह गोवंश टिन शेड की जगह खुले में बने बाड़े में घूमते रहते है। उनमें भी गाय, नंदी, बछड़े सभी एक साथ छोड़ दिए गए है, जिससे वहां रोजाना गोवंश की मौत हो रही है। वहां पहले बीमारी के कारण गोवंश तड़प-तड़पकर मर रहे थे तो अब सर्दी में हालात ज्यादा खराब हो गए है। वहां सर्दी के कारण 12 से ज्यादा गोवंश तड़प-तड़प कर मर गए और वह मरे हुए गोवंश ऐसे ही पड़े रहे। इसके बारे में शनिवार सुबह को पता चला, जब वहां कुछ लोग पहुंचे। उसके बाद गोवंश की मौत पर हंगामा शुरू हो गया और नगर निगम के अधिकारियों को गोवंश की मौत का जिम्मेदार बताते हुए हंगामा किया गया।
भारतीय नवनिर्माण सेना के पदाधिकारी सिर मुंडवाकर बने गांधी के बंदर
गोशाला में अव्यवस्थाओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाले भारतीय नवनिर्माण सेना के जिलाध्यक्ष राम पाहुजा व अन्य सदस्यों को गोवंश कस्त्रत्त्ी माौत का पता चला तो वह भी वहां पहुंच गए। इस तरह सर्दी के कारण गोवंश की मौत हो लेकर उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। वहां हंगामा होता देखकर गोशाला में कार्यरत निगम के डॉक्टर व अन्य कर्मी वहां पहुंच गए। जिनसे राम पाहुजा ने कहा कि गोवंश की मौत बीमारी से होने का अधिकारी दावा करते है। इसलिए उनका पोस्टमार्टम कराया जाए, जिससे उनकी मौत का राज खुल सके कि उनकी मौत सर्दी या बीमारी से हुई है। लेकिन निगम कर्मियों ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया और मरे हुए गोवंश को गोशाला के अंदर ही दबा दिया। इसको लेकर गुस्साए नवनिर्माण सेना के पदाधिकारियों ने गोशाला के अंदर ही विरोध जताते हुए अपना सिर मुंडवाया और वह गांधी जी के तीन बंदर बनकर गोशाला के गेट पर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप था कि इन गोवंश की मौत का नगर निगम के अधिकारी जिम्मेदार है, जिनपर कार्रवाई होनी चाहिए।
नोडल अधिकारी एडीसी भी काट रही कन्नी, बोली कुछ नहीं कह सकती
जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए डीसी केएम पांडुरंग ने एडीसी आमना तस्नीम को नोडल अधिकारी बनाया हुआ है। इसलिए उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि शहर से उठाए गए गोवंश की स्थिति को देखे। लेकिन गोशाला में गोवंश की सर्दी से मौत के बारे में उनसे पूछा गया तो वह भी कन्नी काट गई और इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। इस तरह साफ दिख रहा है कि गोवंश की मौत होने पर अधिकारी अब अपना पीछा छुड़ा रहे हैं। जबकि पिछली बार गोशाला में गोवंश की मौत होने पर एडीसी ने जांच करने के बाद दावा किया था कि गोवंश की मौत बीमारी से हुई है।
बीमार चल रहे थे गोवंश
गोशाला में गोवंश की मौत होने पर नगर निगम के कमिश्नर सुशील कुमार ने कहा कि जिन गोवंश की मौत हुई है, वह बीमार चल रहे थे। उनका उपचार भी कराया जा रहा था, लेकिन उसके बाद भी उनको बचाया नहीं जा सका। गोवंश के उपचार के लिए ही निगम ने गोशाला में डॉक्टर नियुक्त किए हुए है जो लगातार उनकी जांच करते रहते है।