गोहाना की अनाज मंडी में हुई आक्रोश रैली में प्रदेशभर से आए आढ़ती।
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सरकार की ओर लागू की गई ई-ट्रेडिंग प्रणाली के खिलाफ शनिवार को प्रदेश भर की 400 अनाज मंडियां बंद रहीं। जिससे अनाज मंडियों में करीब 100 करोड़ रुपये का व्यापार ठप रहा। प्रदेश भर की अनाज मंडियों से आढ़ती काम बंद कर गोहाना में हुई आक्रोश रैली में पहुंचे जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सरकार की ओर से लागू की गई ई-ट्रेडिंग प्रणाली, बढ़ाई गई मार्केट फीस व हरियाणा रूरल विकास फंड (एचआरडीएफ) 18 सितंबर तक वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश भर की सभी अनाज मंडियां 19 सितंबर से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएंगी। खरीफ फसल धान व बाजरे का एक भी दाना बेचने नहीं दिया जाएगा।
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हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि ई-ट्रेडिंग प्रणाली बहुत जटिल है। जिसमें फसलों की खरीद-फरोख्त ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। खरीददार को फसल का भुगतान अनाज मंडी से माल उठान करने से पहले सीधे किसान के बैंक खाते में करना होगा। जिससे किसानों को नुकसान होगा और प्रदेश की मंडियों से आढ़तियों का नामों निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की इस तरह की मंशा को किसी भी सूरत बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि आढ़तियों की मांगों को सरकार तक कई बार पहुंचाया जा चुका है लेकिन उनकी मांगों को पूरा करने के लिए आढ़तियों को मिलने का समय नहीं दे रही है जिससे आढ़तियों में रोष है। आक्रोश रैली के दौरान प्रदेश कार्यकारी प्रधान रामअवतार तायल, संरक्षक दुनीचंद, चेयरमैन रजनीश चौधरी, को चेयरमैन हर्ष गिरधर, कोषाध्यक्ष स्वर्णजीत सिंह कालड़ा, मुख्य सलाहकार सुरेंद्र मिंचनाबादी आदि मौजूद रहे।
यह हैं मांगें
- कपास, सरसों, मूंग, सूरजमुखी, गेहूं व धान आदि फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाए।
- आढ़तियों को पहले की तरह पूरी आढ़त 2.5 फीसदी दी जाए।
- सरकार की ओर से खरीदी जाने वाली फसलों का भुगतान किसान की इच्छानुसार आढ़ती या किसान के खाते में अदा किया जाए।
- सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर पंजीकृत करने के बावजूद सरकार ने उनकी फसलें नहीं खरीदी। पिछले सीजन में किसानों व आढ़तियों को काफी नुकसान हुआ था। आगामी सीजन में सभी सीमांत किसानों की फसलें खरीदी जाए।
- बढ़ाई गई मार्केट फीस व हरियाणा रूरल विकास फंड (एचआरडीएफ) 4 फीसदी से घटाकर दोबारा एक फीसदी किया जाए।
- पंजाब की तर्ज पर प्रदेश में मार्केटिंग बोर्ड के नियमों में सुधार किया जाए। ताकि इसका लाभ प्रदेश के लोगों को मिल सके।